पोप लियोः कलीसिया गहरे सवालों की ओर ध्यान आकर्षित करती है

पोप लियो 14वें अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की धर्मशिक्षा में कहा कि कलीसिया दुनिया में कलम की गई है जिसका प्रथम कार्य मनुष्यों को जीवन से संबंधित सवालों के बारे में सचेत कराना और उन्हें लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में मदद करना और प्रेम तथा दुःखों के अर्थ को समझने में सहायता करना है।

पोप लियो 14वें अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में उपस्थित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा, भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और सुस्वागतम्।

वाटिकन द्वितीय के धर्मसिद्धांत गौदियुम एत स्पेस पर हम अपना चिंतन जारी रखते हुए आज इसके चौथे अध्याय पर विचार करेंगे जो सामकालीन दुनिया में कलीसिया की प्रेरिताई को समर्पित है।

सर्वप्रथम धर्मसभा हमें इस बात की याद दिलाती है कि कलीसिया अपने में दुनिया “ऊपर” या उसके “बगल” नहीं है बल्कि यह उसमें कलम की गई है। संत अगुस्टीन ने इसे “मुंदुस रेकॉन्सिलियातुस एक्लेसिया” रेखांकित किया, कलीसिया वह दुनिया है जिसका मेल-मिलाप ईश्वर से पहले हो गया है, हम सभी इस पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों की भांति हैं और जो दुनिया की क्षणभंगुरता और सुन्दरता को अपने में साझा करते हैं।

कलीसिया देहधारण की निशानी
पोप लियो 14वें ने कहा कि जिस तरह ईश्वर का पुत्र शरीरधारण करते हुए दुनिया को जीवन देने और पिता से मेल करने आये, उसी भांति कलीसिया दुनिया में ईश्वर के देहधारण की निशानी स्वरुप निवास करती है, जिससे वह उनकी योजना को प्रकट कर सके, जहाँ हम सभी ईश्वर की संतान एक बृहृद मानव परिवार का अंग होने के लिए बुलाये गये हैं। यही कारण है, कलीसिया लोगों और संस्कृतियों के मध्य इतिहास में यात्रा करती है, और “लोगों के जीवन में यह मिलन उसे इस बात को और अधिक स्पष्ट रुप में समझने को मदद करती है कि उनकी प्रेरिताई का दायरा ऐतिहासिक है जिसमें इस बात की ज़िम्मेदारी भी शामिल है कि वह सामाजिक संबंधों का निर्माण किस तरह से करती है।”(मानिफीका ह्यूमानितास, 19)

कलीसिया की प्रेरिताई
पोप ने कहा कि कलीसिया की प्रथम प्रेरिताई लोगों को जीवन के गहरे सवालों के प्रति सतर्क कराना है- जो हमारे जीवन की उत्पत्ति और उसके लक्ष्य से जुड़ी है, इसके साथ ही यह प्रेम और दुःखों के अर्थ को समझना है। (जीएस41)। हर हाल में लाभ कमाने की सोच और सूचनाओं की हेर-फेर, ऐसी जीवन-शैली अपनाने को बहुत ज़्यादा दबाव डालती है जो सिर्फ़ भौतिक चीजों की उपभोक्ता पर केंद्रित हो, लेकिन हमारा हृदय तो ऊपर की ओर देखने के लिए बनाया गया है।

कलीसिया दिशा-निर्देशित करती है
धर्मसभा के आचार्य हमें इस बात की भी याद दिलाते हैं कि कलीसिया की प्रेरिताई अपने में इस बात की भी परिपूर्णत है जहाँ वह इस पृथ्वी रूपी शहर का निर्माण करने में सहयोग करती है। यद्यपि, उसके कार्य करने के तरीके और लक्ष्य अपने में मुख्य रूप से एक राजनीति स्तर का नहीं है, बल्कि विश्वास और प्रेम का साक्ष्य देने में है, जो न्याय, शांति और भातृत्व के प्रति निष्ठा में बने रहना है। ख्रीस्त की आराधना करते हुए, जो अपने में धर्मी हैं जो अधर्मियों के लिए मरे, विश्वासी कमजोर और गरीबों के शोषण को स्वीकार नहीं कर सकते हैं, न ही आश्रित और अन्यायपूर्ण संरचनाएं को जिसका निर्माण किया जाता और उन्हें बनाये रखने की कोशिश की जाती है। कलीसिया की धर्मशिक्षा ख्रीस्तीयों के कार्यों का दिशा-निर्देशन करती है, जो उन नेक हृदयी लोगों के साथ सहयोग करते हैं जो जनहित की चाह रखते हैं। अतः कलीसिया की, “उससे, बड़ी और कोई इच्छा नहीं है कि वह सभों के हित का ख्याल करे, वह किसी भी ऐसी सरकार के तहत खुद को स्वतंत्र रुप से विकसित कर सके जो व्यक्ति और परिवार के बुनियादी अधिकारों और जनसामान्य की ज़रूरतों को मान्यता देती हो” (GS, 42)।

पवित्र आत्मा में सहयोग
पोप लियो ने कहा कि सुसमाचार की प्रेरिताई को प्रभावकारी ढ़ंग से पूरा करने हेतु, हर बपतिस्मा प्राप्त के लिए यह जरूरी है कि वह पवित्र आत्मा की कृपा में निष्ठामय सहयोग करे, जिससे उसका विश्वास सजीव हो और उसकी अभिव्यक्ति आचरण में निरंतर बनी रहे। वास्तव में, जैसे कि धर्मसभा के आचार्यों ने इस बात पर बल दिया, घोषित विश्वास और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बीच का फ़र्क “हमारे समय की सबसे बड़ी गलतियों में गिना जाना चाहिए” (जीएस,43)

गौदियुम एत स्पेस लोकधर्मियों के लिए विशेष प्रेरिताई को अपने में सम्माहित करता है जो बपतिस्मा के आधार पर दुनिया को ख्रीस्तीय के मनोभावओं और सुसमाचार की दृष्टि से सराबोर करना है। इस कार्य के लिए मुख्य परिस्थिति- जिसे हम 'पुरोहितिक गतिविधि के रुप में परिभाषित कर सकते हैं- निस्संदेह परिवार और कार्यस्थल हैं, यद्यपि यह जीवन के हर क्षेत्र को अपने में सम्माहित करता है।

hindi Survey Popup Image