युवाओं से पोप : ‘आत्मा का प्रकाश आलोकित करता और आराम देता है’
फ्रांस में पोप लियो 14वें का पहला दिन एक प्रार्थना सभा के द्वारा खत्म हुआ जिसमें करीब 80,000 युवा शामिल हुए। पोप ने उनके सवालों के जवाब दिए और उन्हें बिना किसी डर के मसीह का अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित किया।
फ्रांस का सबसे बड़ा स्टेडियम, स्टेड डी फ्रांस के 1998 में खुलने के बाद से इतनी भीड़ नहीं देखी गई थी। 80,000 लोगों की क्षमतावाला यह स्टेडियम शुक्रवार शाम को पोप लियो 14वें के जागरण प्रार्थना के लिए पेरिस और पूरे फ्रांस से आए युवाओं से भरा हुआ था। वे सभी अपनी बहुरूपता में दिखे जो गांव और शहर, मजदूर, छात्र, युवा पेशेवर और मेहनती-मजदूर, अपने विश्वास और पोप की बातें सुनने की इच्छा से एकजुट थे।
शाम की शुरुआत साक्ष्य, गानों और कलात्मक कार्यक्रमों के एक उत्सवपूर्ण माहौल में हुई। युवा उत्सव से कसिनी के आवे मारिया की ओर बढ़े, जिसे मुनरो और 2,500 गायकों ने गाया। स्टेडियम में लियो 14वें के आने पर उनके स्वागत में, धर्माध्यक्ष एतियेन गुइली ने इसे 'पूरे फ्रांस का स्टेडियम' बताया, और अपने धर्मप्रांत एवं वहां जमा हुए 80,000 युवाओं की विशेषता बताते हुए कहा कि वे महानगरीय, विभिन्न जातियों और विविध संस्कृतियों से वहाँ एकत्रित हैं।
पोप के सामने, प्रस्तुत झांकियों में कई फ्रांसीसी संतों के जीवन को दर्शाया गया, जिनमें लुस्यु की संत तेरेसा, चार्ल्स दी फौकोल्ड, लुई और जेली मार्टिन, फ्रेडरिक ओज़ानम, लियोनी एविएट, पियर-जूलियन आइमार्ड, जॉन-मैरी वियानी, कैथरीन लाबोरे, बर्नाडेट सोबिरस, फ्रांसिस डी सेल्स, विंसेंट दी पॉल, लुईस दी मारिलैक, जॉन यूड्स, जॉन-बाप्टिस्ट दे ला साले, लुई-मैरी ग्रिग्नियन दी मोंटफोर्ट, बर्नार्ड ऑफ क्लेयरवॉक्स और जर्मेन ऑफ पिब्राक शामिल थे।
यह कार्यक्रम आतिशबाजी और युवाओं की खुशी के साथ खत्म हुई, जिन्होंने ‘लियो, लियो’ का नारा लगाया। पोप ने मुस्कुराकर और हाथ हिलाकर जवाब दिया।
अलग-अलग धर्मों का माहौल
फिर दो युवाओं ने अपनी बातें साक्षा कीं। क्लोए, जो फार्माकोलॉजी की छात्रा हैं और जरूरतमंद इलाकों में काम करती हैं, उन्होंने पोप से पूछा कि वे दूसरे धर्मों के लोगों के साथ अपना विश्वास कैसे साझा कर सकती हैं।
लियो ने जवाब दिया, “हम सब इस आध्यात्मिक गतिशीलता के हिस्से हैं।” पोप ने आगे कहा, “यह सच में एक समस्या है कि इतने सारे लोग ईश्वर के सवाल से अनजान हैं, लेकिन यह भी एक समस्या है कि इतने सारे लोग मानवता के सवाल से अनजान हैं।” उन्होंने दुःख जताया कि बहुत से लोग अपने आस-पास के लोगों में कोई दिलचस्पी नहीं लेते, गरीबों से नफरत करते और कमजोर एवं बीमार लोगों को अनदेखा कर देते हैं, “यह सोचकर कि हर इंसान सिर्फ उतना ही कीमती है जितना वह उत्पादन करता है।”
रोम के धर्माध्यक्ष ने क्लोई को जरूरतमंद इलाकों में अपने काम में लगे रहने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने “उन लोगों के साथ जो हमारे विश्वास को साझा नहीं करते” भाईचारे की भावना से कहा, “यही वह स्थान है, दैनिक जीवन की असलियत में, और कभी-कभी मुश्किलों के बीच, आपका विश्वास उम्मीद का एक जीवित गवाह बन जाता है।”
पोप लियो 14वें ने हाल के सालों में भूमध्यसागरीय देशों के युवाओं के बीच हुई मुलाकातों का भी उदाहरण दिया, और उन्हें भाईचारे का एक हौसला बढ़ाने वाला संकेत बताया।
समर्पण की इच्छा
फ्रांस्वा, जो एक ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं, कृषि विज्ञान की पढ़ाई कर रहे हैं और एक स्काउट लीडर हैं। समर्पण की उत्सुकता के साथ उन्होंने पूछा कि वे अपने जीवन की दिशा कैसे पहचान सकते हैं और खुद को ईमानदारी से उसमें कैसे लगा सकते हैं।
संत पापा ने जवाब देते हुए कहा, “शांति की सेवा के लिए खुद को समर्पित करें, जो हमें आगे बढ़ने में मदद करती है।” समर्पण “डर को उम्मीद में, और शिकायतों को जिम्मेदारी के साथ जुड़ने में बदल देता है’, जबकि ‘हमारे जख्मों को तभी आराम और राहत मिलती है।”
पोप ने आगे कहा कि चिंता और अनिश्चितता, जिसे “आपके उत्साह में रुकावट” के रूप में महसूस किया जा सकता है, भविष्य की योजना की अनिश्चितता, भावनात्मक रिश्तों का अस्थायी होना, मानवीय रिश्तों की नाजुकता, मोबाईल की थकान और जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर चिंता दिखाती हैं।
पोप लियो ने कहा, “हमें इन भावनाओं को ध्यान से सुनना चाहिए,” और अपने साथियों की तकलीफ के लिए अपना दिल खुला रखना चाहिए।
अंत में, संत पापा ने उन लोगों से बात की जो मानते हैं कि वे पुरोहिताई या समर्पित जीवन के माध्यम से येसु के पीछे चलने का बुलावा सुन रहे हैं।” उन्होंने कहा, “फ्रांस में कलीसिया को आपकी बहुत जरूरत है।” “इस बुलावे से नहीं डरें!”
अर्जेंटीयूइल के वस्त्र को सम्मान
दो सवालों के जवाब के बाद, सभा अर्जेंटीयूइल के पवित्र परिधान के सम्मान में प्रार्थना करते हुए मौन धारण की, जिसे विशेषकर युवाओं के लिए स्टेड डी फ्रांस लाया गया था।
पोप ने कहा, “आइए हम अपने सामने रखे दो अवशेषों को देखें, येसु का पवित्र वस्त्र और क्रूस।” उन्होंने दुखभोग के इन दो प्रतीकों पर चिंतन करते हुए कहा, “क्रूस, जो मौत का एक साधन है, उम्मीद का संकेत बन जाता है।”
येसु से लिया गया यह वस्त्र विश्वासियों को “मेमने के खून से धुले हुए सफेद कपड़े” पहनाता है। पोप ने अंत में कहा कि वस्त्र और क्रूस, “हमें दिखाते हैं, कि कलीसिया का जन्म दुनिया को दिए गए ईश्वर के जीवन से हुआ है।”
पोप की अपील
युवाओं से तीन अपील करते हुए, पोप लियो ने कहा: “बचें, आगे बढ़ें और संघर्ष करें।”
पहला, घमंड, अभिमान, हिंसा और लालच से ‘बचें’, क्योंकि ये ऐसी भावनाएँ हैं “जो हमें पकड़ती हैं और हम पर कब्जा कर लेती हैं।”
