पोप लियोः ईश्वर हमारे हृदय की हर प्यास बुझाते हैं
पोप लियो 14वें ने फ्रांस की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन पेरिस के प्लासे देला कोनकोरदिया में मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए मानवीय हृदय की प्यास पर चिंतन करते हुए उसकी तृप्ति पर प्रकाश डाला।
पोप लियो ने फ्रांस की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन पेरिस के प्लासे देला कोनकोरदिया में मिस्सा बलिदान अर्पित किया।
पोप लियो ने अपने प्रेरितिक यात्रा के लिए कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि भाई-बहनों का एक साथ एकता में रहना, सुसमाचार की घोषणा करना कितना सुंदर है। वास्तव में, मैं आशा करता हूँ कि मेरी यह प्रेरितिक यात्रा आपके विश्वास को मजबूत करने, अपने जीवन को साझा करने के द्वारा, और येसु ख्रीस्त में शांति तथा प्रेम में जीवनयापना करते हुए इसे और भी ज्योतिमर्य बनाने में मदद करेगा।
मानव की प्यास
“यदि कोई प्यासा हो, तो वह मेरे पास आए और पीये” (यो 7:37)। भाइयो और बहनों, अपनी प्यास बुझाने के लिए हम मसीह की ओर आते हैं, जो जीवन जल के स्रोत हैं: वह जल जो हमारी प्यास बुझाती और जीवन को समृद्ध बनाती है—ईश्वर के प्रेम का वह जल जो “पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे हृदयों में उंडेला गया है।” (रोमियों 5:5)।
ईश्वर की चाह हमारे हृदयों की गहराई में बनी रहती है, और हम स्तोत्र लेखक के संग पुकारते हैं, “मेरी आत्मा जीवंत ईश्वर की प्यासी है। यह एक नम्र और उत्कंठित हृदय की पुकार है, जिसकी सबसे गहरी और अस्तित्व से जुड़ी प्यास को हम निरंतर बढ़ता पाते हैं। और यह येसु मसीह ही हैं जो अपने शरीरधारण के द्वारा हर इंसान के जीवन की कहानी में उससे मिलने आते, और खुद को उस “जीवन जल” के सच्चे स्रोत स्वरूप प्रकट करते हैं जो हमारी प्यास बुझा सकती है। हर मानव के हृदय में भौतिक चीज़ों की प्यास नहीं है, बल्कि यह जीवन के अर्थ, सच्चाई और परिपूर्णत की प्यास है। येसु हमारे गहरे रिश्ते और ईश्वर के साथ संबंध की चाहत का जवाब देते हैं, जिनमें जीवन की पूर्णतः हमेशा के लिए बसी हुई है।
जीवन जल धारा
पोप ने प्रथम पाठ पर चिंतन करते हुए कहा कि नबी एजेकिएल मंदिर से जलधारा को बहते हुए देखते हैं जो मरूभूमि में फैलती, उसे परिशुद्ध करती और जिन चीजों का स्पर्श करती उनमें जीवन का संचार करती है। बाद में संत योहन येसु के बेधित बगल से जल को प्रवाहित होता देखेंगे जैसे कि उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान अर्पित किया। हर कोई अब उस स्रोत से पी सकता है, जिससे वह पवित्र आत्मा को प्राप्त करें और उसका नया जन्म हो, वह ईश्वर की संतान एक नई सृष्टि बनें।
दुनिया की चीजों में संतुष्टि नहीं
प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि हम इस बात को स्वीकार कर सकते हैं कि दुनिया की कोई भी चीज हमें संतुष्टि प्रदान नहीं कर सकती है। जब हम सोचते हैं कि हमारे कार्य खत्म हो गये हैं और अंत में हमें उपहार मिला है, हमारे लिए हृदय का आंतरिक खालीपन लौटकर आता है जो पहले से अधिक गहरा होता है। और इस भांति, इसी पूर्ति के प्रयास में, हम एक नयी खुशी की खोज करते हैं, अधिक से अधिक चीजों को हासिल करने की चाह रखते हैं, या अपनी आंतरिक विचलन से अपने को दूर करने का प्रयास करते हैं।
हृदय के अंदर देखें- कौन सी प्यास है?
आज के शब्द समारोह की धर्मविधि हमें अपने हृदय के अंदर देखने का निमंत्रण देती और हमें कहती है, हमारी सबसे गहरी प्यास क्या हैॽ वास्तव में, मैं अपने जीवन में क्या खोज रहा हूँॽ हम सभी खुशी, प्रेम और परिपूर्णतः की कामना करते हैं। हम किस स्रोत से उस प्यास को बुझाना चाहते हैंॽ क्या हम भौतिक चीजों से संतुष्ट हैं, तुरंत संतुष्टि, वे सारी असंख्य चीजें जो हमें सारी चीजों की प्रतिज्ञा करती हैं लेकिन हमारे हृदयों को खाली छोड़ देती हैंॽ हम सभों ने बपतिस्मा जीवन जल को पाया है जैसे कि सुसमाचार हमें कहता है, लेकिन क्या सचमुच में हमारी मुलाकात ख्रीस्त से हुई हैॽ असल में, मानव अपने में इच्छा रूपी व्यक्तित्व है और केवल ईश्वर हमारे अंदर के खालीपन को भर सकते हैं।
येसु के कार्य
पोप ने कहा, “हाँ, प्रिय भाइयो एवं बहनों, येसु ख्रीस्त, वे भले चरवाहे हैं, जो हमें खुशी और शांति के स्रोत की ओर आगे ले चलते हैं, जैसे कि एक चरवाहा अपनी भेड़ों के संग करता है। वह हम प्रत्येक को नाम से जानता है।” हमारी कोई भी ऐसी चीज नहीं जो उनसे छिपी है, न ही हमारे रहस्य, हमारी इच्छाएं और न ही हमारी कमजोरियाँ। वे हमारे हृदय की गहराई की थाह लेते हैं। उन्होंने हमें जीवन दिया है और वे हमें निरंतर संस्कारों के माध्यम से जीवन देते रहते हैं। वे चिंतित और घायल भेड़ को अपने कंधों में ढ़ोते, और अपनी कोमलता में खोये हुए को वापस लाते हैं। येसु हमारे लिए पिता के शर्तहीन प्रेम को प्रकट करते हैं। उनकी आंखों में, हममें को कोई भी एक संख्या मात्र नहीं है जो बही खाते में दर्ज हो, बल्कि हम अपने में अद्वितीय और अपरिवर्तनीय हैं।
