पोप लियोः सेवा जीवन का सार
पोप लियो 14वें ने वाटिकन की वाटिका में जेंडरमरिया वाटिकन सेवा में नियुक्त स्विस सैन्य दल के शपथ ग्रहण समारोह का मिस्सा बलिदान अर्पित किया। पोप ने अपने प्रवचन में सेवा, रक्षा और सुरक्षा करने के अर्थ पर प्रकाश डाला।
पोप लियो ने वाटिकन की वाटिका में स्विस सुरक्षा दल के संरक्षक संत माईकेल महादूत का पर्व मनाते हुए वाटिकन सैन्य दल के सदस्यों के लिए ख्रीस्तीयाग अर्पित किया।
पोप ने नबी इसायस के ग्रंथ से लिये गये पहले पाठ पर चिंतन करते हुए कहा कि हमने दाखबारी के बारे में सुना, जिसकी देखभाल प्रेम में की जाती है। “यह अपने लोगों के लिए ईश्वर के प्रेम की निशानी है। ईश्वर ने अपनी दाखबारी के लिए सब कुछ किया और उससे अच्छे फल की उम्मीद करते हैं।” ईश्वर अपने सभी संतानों को अपनी दाखबारी में कार्य करने को बुलाते हैं, ताकि हम दाखबारी और मजदूर दोनों बने। जेंडरमरिया की यह सेवा ईश्वरीय दाखबारी में मज़दूर स्वरूप सेवा के कार्य करने का एक तरीका है। आप को स्थलों, प्रवेश द्वारों, ईमारतों, और उससे भी बढ़कर, लोग की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। देखभाल की यह सेवा अपने में कितना यह अच्छा है, आप दूसरों को समस्याओं के तौर पर नहीं देखते जिन्हें सुलझाना है, बल्कि ऐसे लोगों के रूप में देखते हैं जिनका सम्मान और जिनकी देखभाल की जानी है।
जिम्मेदारी की शैली
पोप ने सुसमाचार के दृष्टांत पर अपने चिंतन व्यक्त करते हुए कहा कि जिन कार्यों की जिम्मेदारी हमें मिली है, हमें उसे विनम्रता और लगन से करने की आवश्यकता है, यह हमें समझदारी और कर्तव्य की भावना में जीवन जीने का आहृवना करता है। सुसमाचार के प्रकाश में हम यह देखते हैं कि अधिकार की अभिव्यक्ति सुरक्षा करने, सुनने और सहचर्य की भावना में अपने को मजबूती और सम्मान से व्यक्त करने में होती है।
येसु हमें कहते हैं कि दाखबारी का मालिक अपने पुत्र को भेजता है। दृष्टांत का केन्द्रविन्दु पुत्र है जो मुक्तिदाता हैं। संत पापा ने कहा कि आपके जीवन का केन्द्र बिन्दु उस येसु ख्रीस्त की सेवा करना होना चाहिए। जेंडरसैन्य होने के पूर्व भी आप उनका अनुसारण करने के लिए बुलाये जाते हैं। उनसे हम शक्ति के बारे में सीखते हैं जो हमें नम्र बनती है, वह धैर्य जो सावधानी से उत्पन्न होती, वह अधिकार जो विनम्रता के साथ-साथ चलती है, और वह साहस जो करूणा से उत्पन्न होती है।
चिंता न करें
दूसरे पाठ का जिक्र करते हुए संत पापा ने कहा कि संत पौलुस हमें किसी चीज की चिंता नहीं करने को कहते हैं बल्कि हरल चीज को ईश्वर के सामने प्रस्तुत करने को आहृवान करते हैं। यह भी आप की सेवा से मेल खाता है। आप के दिन सुखद और कठिनाई से भरे होंगे, वे क्षण जहाँ शीघ्रता से निर्णय लेने की जरुरत होगी, वे परिस्थितियां जो आप को चिंतित करेंगी। सुरक्षा कर्मी हर चीज को अकेले वहन नहीं करता है, वह प्रार्थना करता है, वह विश्वास करना जानता है, वह शांति में ईश्वर की खोज करने जानता है जो उसे स्पष्टता और शांतिमय हृदय से कार्य करने में मदद करता है।
अच्छी और सच्ची चीजों की खोज
प्रेरित इस बात को जोड़ते हैं, “जो कुछ सत्य है, आदरणीय, न्यायपूर्ण, निर्दोष, प्रतीतिकर, मनोहर और उत्तम है हम उन चीजों पर विचार करें।” यह हमारे हृदय और मन को अच्छे कार्यो के लिए प्रशिक्षित करने से है। बाह्य चीजों से पहले हमारे लिए आंतरिक चीजें आती हैं। वे जो दूसरों की सुरक्षा करते हैं उन्हें चाहिए कि वे पहले सच्चाई न्याय, अच्छाई और स्वयं अपने सम्मान की रक्षा करें। दूसरों की सुरक्षा का तात्पर्य एक हृदय की मांग से है जो ईश्वर से सुरक्षित है।
सावधान रहें
आपके कार्य आपसे सावधान रहने की मांग करता है, लेकिन आज का प्रभु वचन हमें इससे भी गहरी बातों के बारे में कहता है- स्वयं पर ध्यान रखना। अपने हृदयों की रक्षा करना, ताकि वे कठोर न हों बल्कि हमेशा ईश्वर के प्रति विनम्र और दूसरों पर ध्यान देने वाला बन रहे। संत पापा ने कहा कि आप अपनी अंतरात्मा की रक्षा करें, ताकि वह आपको सही रास्ते पर ले जाये, जिससे आप अपने भाइयों की सुरक्षा कर सकें, ताकि आप के द्वारा हर कोई स्वागत, मदद प्राप्त करते हुए कभी अकेला महसूस न करें। क्योंकि एक दल “समुदाय” तब बनता है जब उसके सदस्य एक-दूसरे का ध्यान रखते हैं और साथ चलना सीखते हैं, तथा सादगी और प्रेम से एक-दूसरे का साथ देते हैं।
