पोप लियोः कलीसिया को आप की जरुरत है
संस्कृति और शिक्षा विभाग द्वारा आयोजन कार्यक्रम के तहत, “संभावना की कला: सबों को साथ लाना” की विषयवस्तु से जमा हुए, कलाकारों और क्यूरेटरों को पोप लियो 14वें ने संबोधित करते हुए कहा कि आप को कलीसिया की जरुरत है।
पोप लियो 14वें ने कलाकारों और क्यूरेटरनों को अपने संदेश में कहा, “कलीसिया को आप की जरुरत है।”
पोप ने सभी कलाकारों को उनके कार्य और सहयोग हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट किये जिन्होंने हाल के सालों में परमधर्मपीठ से सहयोग किया है, खासकर वेनिस बिएनले के अंतरराष्ट्रीय पवेलियन के निर्माण कार्य में मदद करते हुए, संस्कृति तथा शिक्षण हेतु स्थापित विभाग के संग सहयोग किया। पोप ने सभों के प्रति अभार व्यक्त करते हुए कहा कि उस भरोसे के लिए धन्यवाद जिसके साथ आप कलीसिया के साथ चलने के लिए सहमत हुए, यहाँ तक कि नए रास्तों पर भी।
पोप लियो नें गिउडेका आइलैंड पर महिलाओं की कैदखाने में बनाये गये पावेलियन की याद की जिसकी भेंट पोप फ्रांसिस ने की थी। “यह केवल कैदखाने में कला के कार्यों से संबंधित नहीं था, बल्कि उसे, उसकी अक्सर दबी हुई सच्चाई को प्रकट करते हुए, कला और शिक्षण की ओर ध्यान आकर्षित कराना था।” मानव अपने जीवन में सदैव ही अपने अनंत लक्ष्य की ओर अग्रसर करने को आमंत्रित है, वह हमेशा अपनी गलतियों या कमजोरियों से बढ़कर है।
कला एक ऐटीना
पोप ने बिएनले पवेलियन के आदर्श वाक्य, “कान हृदय की आंख है” का जिक्र करते हुए कहा कि, वास्तव में, कला अपने में ऐटीना की भांति है जो मानव हृदय के बड़े सवालों को पकड़ लेता है जो कई बार एक रूदन में, और बहुधा एक फुस्फुसाहट में व्यक्त होती जो उन्हें सुनती, देखती और बांटती है।
कला में बेचैनी की शक्ति
कला के संबंध में, संत अगुस्टीन, हृदय की बेचैन चाह की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए पोप ने कहा, “सच्ची कला अपने में बेचैनी को प्रकट करती है।” कलीसिया ने कला को कभी भी एक वस्तु मात्र नहीं देखा है। संत अगुस्टीन के विचारों को प्रकट करते हुए पोप ने कहा कि सच्ची कला, लोगों के हृदयों में बेचैनी उत्पन्न करती है। कलीसिया के लिए, कला सुनने की एक बुनियादी जगह है, एक ऐसी जगह जहाँ कोई भी अपने को मानवता की उम्मीदों और उसके ज़ख्मों, सुंदरता, न्याय और शांति की प्यास, तथा उसके अर्थ से अपने को स्पर्श होता पाता है।
खोज रूपी इंजन
हम खोज रूपी इंजन के समय में हैं, जहाँ हमें एक सेकंड में हज़ारों जवाब मिलते हैं। लेकिन ये इंजन, चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, वही दिखाते हैं जो पहले से मौजूद हैं, वे हमें वही देते हैं जो हमें पहले से मिला है। तकनीकी और उपभोक्ता के समय में, हमारे लिए बड़ा खतरा सिर्फ़ काँट-छाँट नहीं, बल्कि ऊबाऊपन है; सिर्फ़ थोपी हुई चुप्पी नहीं, बल्कि वह शोर जिससे सुनना नामुमकिन हो जाता है।
पोप ने कहा कि कला एक तरह का “खोजी इंजन” है। यह सूचीक्रम से नहीं, बल्कि पूछताछ से आगे बढ़ती है। इसका सवाल ध्यान आकर्षित करने से है, जो सिर्फ़ जोड़ से संतुष्ट नहीं होता, बल्कि यह गहराई में जाकर, जोड़ने वाले धागे की खोज करता है। “आपकी कला, ऊबाऊपन का विरोध करती है, जब वह नज़र को धीमा करती है, जो हमें उस चीज़ के सामने रुकने पर मजबूर करती है जिसे समझा नहीं जा सकता है, तो वह संस्कृति और आध्यात्मिकता को पुनः जन्म देती है।”
आप कलीसिया की जरुरत
पोप पॉल 6वें ने ऐसी बातें कहीं जो कलाकारों के साथ कलीसिया के रिश्ते में मील का पत्थर बनी, "हमें आपकी ज़रूरत है।” “हमारी प्रेरिताई को आपके सहयोग की ज़रूरत है। क्योंकि, जैसा कि आप जानते हैं, हमारी प्रेरिताई का लक्ष्य है सुसमाचार प्रचार करना और ईश्वर की खोज करना है, अनदेखी, अकथनीय दुनिया को आसान और समझने योग्य हृदय को छूने वाला बनाना है। और इस काम में, जो अनदेखी दुनिया को आसान, समझने लायक निशानियों में बदलता है, वह दक्षता आप में हैं।”
पोप लियो 14वें ने पोप पॉल 6वें के वचनों को दुहराते हुए कहा, “आज, मैं भी आपसे कहता हूँ: कलीसिया को आपकी ज़रूरत है। खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की इस अवधि में, जिसमें मानव कला को मशीनों की बनी कला से अलग करना बहुत ज़रूरी हो गया है। कला और मशीन से उत्पन्न चीजों में सात्त्विक अंतर है। एल्गोरिदम में मानवीय चमक की कमी होती है। “संस्कृति और कला, इस वास्ताविक चमक को बचाए रखती है” (मैग्निफिका ह्यूमैनिटास, 122)।
इन्हीं कारणों से, कलीसिया कलकारों और संस्कृतिक संस्थानों के संग अपने संबंध को नवीन बनाने की चाह रखती है,जिससे मानव की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रिय कलाकारों और क्यूरेटर्स, पोप ने कहा कि कलीसिया आपको सम्मान, आभार और उम्मीद की निगाहों से देखती है, उसे आपकी ज़रूरत है, और वह आपके साथ चलना चाहती है, ताकि हम सब मिलकर उस शानदार मानवता को बचा सकें जो हमें सौंपी गई है।
