खेल शरीर और आत्मा की है औषधि, पोप लियो
पोप लियो 14 वें ने गुरुवार को इतालवी तैराकी संघ और इंटरनेशनल स्विमिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों के साथ मुलाकात में शरीर और आत्मा के विकास में खेल के महत्व की सराहना की।
पोप लियो 14 वें ने गुरुवार को इतालवी तैराकी संघ और इंटरनेशनल स्विमिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों के साथ मुलाकात में शरीर और आत्मा के विकास में खेल के महत्व की सराहना की।
रोम के ऐतिहासिक फोरो इतालिको स्टेडियम में 26 से 28 जून तक 62वीं सेत्ते कॉल्ली ट्रॉफी चैंपियनशिप जारी है जो आगामी यूरोपियन चैंपियनशिप और भू-मध्यसागरीय खेलों से पूर्व आखिरी क्वालिफाइंग इवेंट है।
शरीर और आत्मा की औषधि
अपने प्रभाषण में पोप लियो 14 वें ने कहा कि यदि खेल को सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह शरीर और आत्मा के लिए औषधि का काम कर सकता है। उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति के अलग-अलग पहलुओं को एकीकृत करता है और खिलाड़ियों को समर्पण, प्रतिबद्धता, एकजुटता और ईमानदारी जैसे बहुत ज़रूरी मूल्यों की ओर ले जाता है।”
पोप ने कहा कि प्रतिस्पर्धी खेल गतिविधियों में खिलाड़ी खेलों के निष्पादन हेतु अपनी इच्छाशक्ति का प्रदर्शन कर स्वतः के प्रेरक बल एवं गुण को प्रकाशित करता है। उन्होंने कहा कि कि शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा, खेल और विशेष कर तैराकी आध्यात्मिक पोषण का भी मौका देती है।
माँ के गर्भ जैसा
पोप ने कहा, “तैरने का अभ्यास तब किया जाता है जब आप जल जैसे तत्व में डूबे रहते हैं, जो इंसान को घेरे रहता है।” उन्होंने कहा, “यह एक तरह से उस पहलू की याद दिलाता है जिसने हमें हमारी माँ के गर्भ से बनाया है: जीने का मतलब है दूसरों के साथ और अपने आस-पास के माहौल के साथ तालमेल बिठाकर चलना सीखना।” उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों के लिए, जल स्नान संस्कार और प्रभु येसु ख्रीस्त में नवजीवन का प्रतीक है।
खेल के मूल्य
पोप लियो ने याद दिलाया कि सेत्ते कॉल्ली ट्रॉफी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने वाले दुनिया भर से आते हैं, जो उसी जुनून और मूल्यों से प्रेरित होते हैं जो भाषा या संस्कृति से परे हैं। उन्होंने कहा, “यह पहलू, अन्तरराष्ट्रीय खेलों की विशेषता, उम्मीद की निशानी और उस दुनिया की निशानी है जिसे हम चाहते हैं। यह लोगों के बीच शांतिपूर्ण पुनर्मिलन और भाईचारे में मदद प्रदान करता है।”
पोप लियो 14 वें ने पेशेवर तैराकों को अभ्यास करते रहने और खेल के मूल्यों को प्रसारित करने हेतु प्रोत्साहन दिया और उन्हें सन्त पियर जोर्जो फ्रासाती की मध्यस्थता के सिपुर्द करते हुए कहा, “प्रतिस्पर्धा का युग गुज़र जाता है, लेकिन खेल के मूल्य बरकरार रहते हैं!”