राष्ट्रीय सिनॉडल सभा के दूसरे दिन के प्रमुख विषय
राष्ट्रीय सिनॉडल सभा के दूसरे दिन मुख्य रूप से युवाओं का साथ देने, समग्र पारिस्थिति और सामाजिक न्याय पर प्रकाश डाला गया।
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (CCBI) की राष्ट्रीय सिनॉडल सभा का दूसरा दिन, बेंगलुरु के महाधर्माध्यक्ष पीटर मचाडो की अध्यक्षता में पवित्र मिस्सा बलिदान के साथ शुरू हुआ। राष्ट्रीय सिनॉडल सभा 1- 3 मई तक बैंगलोर के सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज में सम्पन्न हुई जिसका विषयवस्तु थी, “आशा के सिनॉडल तीर्थयात्री।”
ख्रीस्तयाग के दौरान अपने प्रवचन में, महाधर्माध्यक्ष पीटर मचाडो ने सभा के प्रतिभागियों से ख्रीस्त से जुड़े रहने जो हमारे “मार्ग” हैं तथा आशा के तीर्थयात्रियों के रूप में एक साथ चलने के लिए आमंत्रित किया। एम्माउस की यात्रा पर चिंतन करते हुए, उन्होंने सभा को याद दिलाया कि ख्रीस्त अपने लोगों के साथ होते हैं, विशेषकर अनिश्चितता के समय में, और उन्होंने गरीबों तथा हाशिए पर पड़े लोगों के लिए नए सिरे से प्रतिबद्ध होने की अपील की। उन्होंने सिनॉडल यात्रा को धन्य कुँवारी मरियम की मध्यस्थता को सौंप दिया।
2 मई की बातचीत दो खास मुद्दों पर केंद्रित थी: युवा और बच्चे, तथा गरीबी और पर्यावरण।
युवा और बच्चों के सत्र में मोडेरेटर फादर सुरेश मैथ्यू ने युवाओं की प्रेरिताई में उनकी उम्र के हिसाब से प्रेरितिक देखभाल पर जोर दिया। प्रस्तोता सुनील एंटनी थॉमस और शोय थॉमस ने जागरूकता, मजबूत रिपोर्टिंग सिस्टम और गलत व्यवहार के लिए शून्य सहिष्णुता जैसे सुरक्षा उपायों की जरूरत पर बल दिया। इस बात पर जोर देते हुए कि “संबंध बदलाव लाते हैं जबकि कार्यक्रम सिखाते हैं,” उन्होंने सच्ची गवाही, गहरे जुड़ाव और साथियों के समर्थन, गुरूजनों के मार्गदर्शन और प्रेरितिक दिशानिर्देश के जरिए साथ दिये जाने की आवश्यकता बताई। परिवार-पल्ली सहयोग और युवाओं को नेतृत्व की भूमिका निभाने में काबिल बनाने के महत्व पर जोर दिया गया, साथ ही डिजिटल स्पेस (सोशल मीडिया) में सार्थक उद्देश्यों के लिए जुड़ाव की जरूरत बतायी।
गरीबी और पर्यावरण सत्र में ओलिंडा टिम्स ने समग्र पारिस्थितिकी और सामाजिक समानता की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए, पर्यावरण और सामाजिक चिंताओं के आपस में जुड़े होने पर बात की। जीन डी'कुन्हा ने, लौदातो सी से प्रेरणा लेते हुए, "धरती की पुकार और गरीबों की पुकार" पर ध्यान देने की अपील की, और सतत् जीवनशैली और पारिस्थितिकी न्याय पर जोर दिया। अर्लीन मनोहरन ने आर्थिक विकास और लगातार गरीबी के बीच बढ़ते अंतर की ओर ध्यान खींचा, और कहा कि कमी, आय से ज्यादा इज्जत, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच को भी शामिल करती है। प्रतिभागियों को न्याय और समावेश पर आधारित ठोस कदम के साथ जवाब देने की चुनौती दी गई।
दिन का समापन मौन, प्रार्थना, आध्यात्मिक बातचीत और पवित्रतम संस्कार की आराधना के साथ हुआ, क्योंकि प्रतिभागी भारत में अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और मिशनरी कलीसिया के लिए रास्ते पर आत्ममंथन कर रहे थे।