श्रीलंका में काथलिक कलीसिया ने चक्रवात दितवा की वजह से आई खतरनाक बाढ़ से समुदायों को उबरने में मदद करने के लिए पूरे देश में मानवीय और प्रेरितिक मदद पहुँचायी है। पिछले साल के अंत में चक्रवात दितवा के कारण 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग प्रभावित हैं।
दुनियाभार में शांति की स्थिति को खतरे में देखते हुए यूरोपीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की समिति के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष जिंतारास ग्रुसास ने ख्रीस्तीयों का आह्वान किया है कि वे ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना सप्ताह 18 – 25 जनवरी के बीच शांति के लिए प्रार्थना करें।
हाल के सालों में इस अफ़्रीकी देश में कई खराब मौसम की घटनाएँ हुई हैं। इस आपातकाल का सामना करते हुए, काथलिक कलीसिया ने कारितास मडागास्कर के ज़रिए, एड हॉक मानवीय प्रोग्राम के ज़रिए अपनी कोशिशें तेज़ कर दी हैं। इटली ने नकद आर्थिक सहायता दी है ताकि परिवार अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें।
अपने वार्षिक सम्मेलन के अंत में, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य के धर्माध्यक्षों ने नई सरकार से देश में शांति बनाए रखने की ज़ोरदार अपील की, जो सालों से हिंसा, विस्थापन, गरीबी और बंटवारे से जूझ रहा है।
येरूसालेम के लैटिन प्राधिधर्माध्यक्ष ने उम्मीद जताई है कि ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन और ज्यादा “हिंसा और खून-खराबे” में नहीं बदलेंगे, और उन्होंने गजा में “पूरी तरह तबाही” की स्थिति की निंदा की है।
वेनेजुएला में राजनीतिक संकट के बीच देश के धर्माध्यक्षों ने बच्चों एवं शिक्षकों को आमंत्रित किया है कि वे एक नये शैक्षणिक वर्ष की शुरूआत करें इस उम्मीद के साथ कि समाज का निर्माण न्याय, शांति और लोकतंत्र पर आधारित है।
घरेलू हिंसा और उसके पीछे छोड़े गए दर्द के बीच, भले चरवाहे की दयामयी माता के धर्मसमाज की धर्मबहनें माल्टा और पुर्तगाल में महिलाओं और लड़कियों के साथ अपनी ज़िंदगी साझा करती हैं, क्योंकि उन्हें समाज द्वारा अलग-थलग किए जाने का सामना करना पड़ता है।
तेज़ सर्दियों की हवाओं की वजह से दसियों तम्बु गिर गए जिसकी बजह से 3 लोगों की मृत्यु हो गई और 5 घायल हैं। पट्टी में इंसानी हालात बहुत मुश्किल बने हुए हैं, और खबर है कि अमेरिकी शांति योजना के दूसरे स्तर की विस्त्रृत जानकरी देने के लिए तैयार है।
सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल ( आरएसएफ) के बीच खूनी लड़ाई में उतरी दारफुर में नए नरसंहार हुए हैं। अभी दो दिन पहले, देश के दक्षिण-पूर्व में एक और बड़ा हमला हुआ, जिससे हज़ारों लोग देश के अंदर ही बेघर हो गए।