पोप लियोः यूखारीस्त से अपने को परिवर्तित होने दें
पोप लियो 14वें ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में वाटिकन द्वितीय महाधर्मसभा के धर्मविधि अनुष्ठान पर अपनी धर्मशिक्षा माला प्रदान करते हुए पवित्र यूख्रारीस्तीय बलिदान पर चिंतन किया।
पोप लियो ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्राँगण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात एवं सुस्वागतम्
हम वाटिकन द्वितीय महाधर्मसभा के धर्मसिद्धांत, विशेष कर स्क्रोसंतुम कोन्सिलियुस, धर्मविधि पर अपनी धर्मशिक्षा माला को जारी रखते हैं।
उन्होंने कहा कि जब संत अगुस्टीन ख्रीस्त के रहस्यमय शरीर के बारे में नये दीक्षार्थियों को बताने की चाह रखते हैं, तो वे संत पौलुस के इन पदों का उपयोग करते हैं जिसे हमने अभी-अभी सुना है, “इसी तरह आप सब मिलकर मसीह के शरीर हैं और आप में से प्रत्येक उसका एक अंग हैं।” (1 कुरू. 12.27) वे इस बात को जोड़ते हैं “यह स्वयं आप का रहस्य है जिसे आप प्राप्त करते हैं। आप जो हैं उसका प्रत्युत्तर यह कहते हुए देते हैं- आमेन, और आप का यह उत्तर आपकी पहचान बनती है। आप से कहा जाता है, “ख्रीस्त का शरीर”, और जवाब में आप कहते हैं, “आमेन”। अतः आप ख्रीस्त के शरीर का अंग बनें, जिससे आप के आमेन की सत्यता साबित हो। “आप जो देखते हैं और आप जो हैं उसे स्वीकार करें”।
ख्रीस्तयाग में सहभागिता का अर्थ
पोप लियो ने कहा की येसु के अंतिम व्यारी के भोज की याद करते हुए, धर्मविधि के धर्मसिद्धांत हमें संत अगुस्टीन के शब्दों में यूख्रारीस्त के बारे में कहते हैं। ख्रीस्तीयों के लिए, ख्रीस्त के भोज में शामिल होने का अर्थ “ईश्वर के वचनों से शिक्षा ग्रहण करना, उसके द्वारा पोषित होना और ईश्वर को धन्यवाद देना है”। हम उन्हें उनके शब्दों में और यूखारीस्त में ग्रहण करने के द्वारा वही बनते हैं जिसे हम ग्रहण करते हैं। हम वह शरीर बनते हैं जिसका शीर्ष पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त हैं, जो पिता के दाहिने विराजमान हैं, (कलो. 1.18) जो हमारे लिए स्वर्ग में एक स्थान तैयार करते हैं (यो. 14.3)। इस भांति यूखारीस्त ईश्वरीय राज्य का वह संस्कार है जो आने वाला है। यह वह रोटी है जो स्वर्ग हमारे निवास की ओर यात्रा करने हेतु हम अग्रसर करती है, उस पुण्य समय तक जब “ईश्वर सबकुछ पर शासन करेगा” (1 कुरू. 15.28)।
ईश्वर और एक-दूसरे संग एकता
पोप ने कहा कि विश्वासियों का समुदाय धर्मविधि के दौरान “न सिर्फ पुरोहित के हाथों से बल्कि उनके संग बलि अर्पित करते हैं” (SC,48)। इस दृष्टिकोण से,यूखारीस्त ख्रस्तीयों के लिए आध्यात्मिक बलि का स्वरूप है (इब्रा. 13.16, रोम.12.1), ईश्वर और एक-दूसरे के संग एकता का एक मार्ग। इसमें सहभागी होते हुए, हमें इस बात को सीखते हैं- “अपने को समर्पित करने, ख्रीस्त की मध्यस्थता द्वारा, हम अपने को प्रति दिन ईश्वर और एक-दूसरे के संग एक गहरे संबंध में प्रवेश करता हुआ पाते हैं”। इस भांति, ख्रीस्त के संग अपने को एक शरीर बनाते हुए, यूखारीस्त हमें येसु ख्रीस्त की जीवन शैली को अपनाने की शिक्षा देती है, जहाँ हम उन्हें अपने को स्वतंत्र उपहार स्वरुप अर्पित पाते हैं। यह उपहार हमें एकता के आयाम में संयुक्त करता है, जो हमें दुनिया, हमारे समुदायों, हमारे परिवारों और हमारे हृदयों को बांटने वाली ताकतों के मध्य हमें एक शक्तिशाली मारक बनाती है। (SC, 47)