देवदूत प्रार्थना : ईश्वर दुनिया को दूर से नहीं देखते
प्रभु के बपतिस्मा महापर्व के दिन पोप लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। जहाँ उन्होंने विश्वासियों को अपने बपतिस्मा के वरदान पर चिंतन करने एवं इसका साक्ष्य हमेशा एवं खुशी से देने के लिए आमंत्रित किया।
संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में जाड़े की प्यारी धूप में पोप लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्यारे भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।
येसु के बपतिस्मा का महापर्व जिसको हम आज मना रहे हैं, इसके साथ सामान्य काल शुरू होता है। यह धर्मविधिक काल हमें प्रभु का अनुसरण करने, उनके वचनों को सुनने और दूसरों के प्रति प्रेम के उनके भाव को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है। ऐसा करके हम हमारे बपतिस्मा को पुष्ट और नवीकृत करते हैं। यह संस्कार जो हमें ख्रीस्तीय बनाता है हमें पाप से मुक्त करता और अपने जीवन की आत्मा की शक्ति से हमें ईश्वर के बेटे-बेटियाँ बनाता है।
बपतिस्मा हमें कलीसिया में लाता है
आज का सुसमाचार पाठ बतलाता है कि अनुग्रह का यह प्रभावशाली चिन्ह कैसे घटित होता है। जब येसु यर्दन नदी में योहन बपतिस्ता से बपतिस्मा लेते हैं, तब वे ईश्वर की आत्मा को कपोत के रूप में उनपर उतरते एवं ठहरते देखते हैं। (मती. 3:16) उसी समय, खुले आसमान से पिता की आवाज गूंजती है: “यह मेरा परमप्रिय पुत्र है” (पद 17)। उसी क्षण, ईश्वर इतिहास में विराजमान हो जाते हैं: जैसे ही पुत्र यर्दन के पानी में प्रवेश करता है, पवित्र आत्मा उसपर उतरता और उसके द्वारा, हमें पवित्र आत्मा मुक्ति की शक्ति के रूप में दिया जाता है।
पोप ने कहा, “प्यारे मित्रो, ईश्वर दुनिया को दूर से नहीं देखते, न ही हमारे जीवन, हमारी परेशानियों या हमारी उम्मीदों की परवाह करने से चूकते करते! इसके बजाय, वे अपने वचन की प्रज्ञा के साथ हमारे बीच आते हैं, जो शरीर में बदल गया है, और हमें पूरी मानवता के लिए प्यार की एक अनोखी योजना में खींचते हैं।
येसु हमारा सब कुछ अपने ऊपर लेते हैं
यही कारण है कि योहन बपतिस्ता आश्चर्यचकित होकर पूछते हैं, आप मेरे पास आते हैं? जी हाँ अपनी पवित्रता में प्रभु बपतिस्मा ग्रहण करते हैं, एक पापी की तरह, ताकि ईश्वर की असीम करुणा को प्रकट कर सकें। एकलौता बेटा, जिनमें हम भाई-बहन हैं, हावी होने के बजाय सेवा करने, बुराई करने के बजाय बचाने आते हैं। वे प्रभु, मुक्तिदाता हैं। वे हमारा सब कुछ अपने ऊपर ले लेते हैं, जिसमें हमारा पाप भी शामिल है, और हमें वह प्रदान करते हैं जो उनका है: नया और अनन्त जीवन की कृपा।
बपतिस्मा की यह कृपा इस घटना को हर युग एवं हर स्थान पर प्रस्तुत करती है, और हम प्रत्येक का स्वागत कलीसिया में करती है। ईश प्रजा जो हर देश और संस्कृति के पुरूषों एवं महिलाओं से बनी है उनकी आत्मा में नया जन्म लेती है।
इसलिए आइये आज हम उस महान कृपा को याद करें जिसको हमने प्राप्त किया है, खुशी और सच्चाई के साथ इसकी गवाही देने के लिए खुद को समर्पित करें।
बपतिस्मा संस्कार की मुहर
उनके हाथों से बपतिस्मा लेनेवाले बच्चों की याद करते हुए पोप ने कहा, “आज ही, मैंने कई नवजात बच्चों को बपतिस्मा दिया जो विश्वास में हमारे नए भाई-बहन बन गए। ईश्वर के प्यार की खुशी मनाना कितना सुंदर है। एक परिवार के रूप में वे हमें नाम से बुलाते और हमें बुराई से मुक्त करते हैं! यह पहला संस्कार एक पवित्र मुहर है जो हमेशा हमारे साथ रहता है। बपतिस्मा, अंधकारमय क्षण में रोशनी है; जीवन की मुश्किलों में, मेल-मिलाप है और मृत्यु के समय, स्वर्ग का रास्ता।
अतः पोप ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, “आइये हम एक साथ प्रार्थना करें, कुँवारी मरियम से अर्जी करें कि वे हमारे विश्वास एवं कलीसिया के मिशन को हर दिन मजबूत करें।”
इतना कहने के बाद पोप ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।