ईरान पर पोप: शांति धमकियों या जानलेवा हथियारों से नहीं बनती

देवदूत प्रार्थना के उपरांत पोप लियो ने राष्ट्रों से शांति की तलाश करने की अपनी दैनिक जिम्मेदारी याद रखने की अपील की, क्योंकि अमरीका और इस्राएल के ईरान पर हवाई हमले करने के बाद मध्यपूर्व में हिंसा बढ़ गई है।

पोप ने कहा, “मैं गहरी चिंता के साथ मध्यपूर्व और ईरान में इस समय जो हो रहा है, उसे देख रहा हूँ। स्थिरता और शांति आपस में एक-दूसरे को धमकियाँ देने या हथियारों से नहीं बनतीं, जो तबाही, दर्द और मौत फैलाते हैं, बल्कि यह सिर्फ सही, सच्ची और जिम्मेदारपूर्ण बातचीत से ही बनती है।"

शांति की अपील
उन्होंने हिंसा रोकने की अपील करते हुए कहा, “बहुत बड़ी त्रासदी की संभावना को देखते हुए, मैं इसमें शामिल पार्टियों से दिल से अपील करता हूँ कि वे हिंसा के इस चक्र को रोकने की नैतिक जिम्मेदारी लें, इससे पहले कि यह कभी न भरनेवाली खाई बन जाए! कूटनीति अपनी भूमिका फिर से हासिल करे और उन लोगों की भलाई को बढ़ावा दे जो न्याय पर आधारित शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहते हैं।”

और शांति के लिए प्रार्थना करने का आग्रह करते हुए कहा, “आइए, हम शांति के लिए प्रार्थना करना जारी रखें।”

पोप ने हाल के दिनों में, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हुए झड़पों के लिए भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं बातचीत पर तुरन्त वापस लाने की अपील करता हूँ। आइए, हम सब मिलकर प्रार्थना करें कि दुनियाभर के सभी झगड़ों में शांति बनी रहे। सिर्फ शांति, जो ईश्वर का वरदान है, लोगों के बीच के घावों को भर सकती है।”

ब्राजील के बाढ़ पीड़ितों के प्रति सामीप्य
उसके बाद पोप ने ब्राजील के बाढ़ पीड़ितों की याद की तथा उनके प्रति अपना सामीप्य व्यक्त करते हुए कहा, “मैं ब्राजील के मिनास गेरैस राज्य के लोगों के करीब हूँ, जो भयंकर बाढ़ से प्रभावित हैं। मैं पीड़ितों, उन परिवारों के लिए प्रार्थना करता हूँ जिन्होंने अपने घर खो दिए हैं, और राहत कार्यों में लगे लोगों के लिए भी प्रार्थना करता हूँ।”

तत्पश्चात् पोप ने रोम, इटली तथा विश्व के विभिन्न देशों से आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया तथा सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।