शहरी योजनाओं में बेघर लोगों की समस्या पर ध्यान दिया जाये
संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक मिशन ने बेघर लोगों की समस्या को दूर करने के महत्व पर ज़ोर दिया है ताकि ऐसे धारणीय एवं टिकाऊ शहर बनाए जा सकें जो मानव सम्मान और जन कल्याण को बढ़ावा दें।
परमधर्मपीठ का सन्देश
संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक मिशन ने 28 जुलाई, 2026 को जारी एक सन्देश में कहा कि सतत विकास की ओर बढ़ते शहरों के निर्माण हेतु बेघर लोगों की समस्या पर ध्यान देने की ज़रूरत है, जो प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करें और आम भलाई में योगदान दें। बयान में कहा गया, “बेघर लोगों का बने रहना अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की अंतरात्मा को परेशान करना चाहिए।”
सन्देश में कहा गया, “हर किसी को एक ऐसी जगह मिलनी चाहिए जिसे वह घर कह सके, जहाँ वह रिश्ते बना सके, परिवार को संभाल सके और समाज में पूरी तरह से हिस्सा ले सके। अस्तु, घर को सिर्फ़ एक उपभोग की वस्तु या वित्तीय परिसंपत्ति के तौर पर नहीं बल्कि समाज की नींव के पत्थर के तौर पर देखा जाना चाहिए जो सबकी भलाई के लिए काम करे।”
एकात्मता, भाईचारा और मुलाकात
परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक मिशन का सन्देश न्यूयॉर्क में जारी नवीन शहरी कार्यसूची पर संयुक्त राष्ट्र संघीय आम सभा 2026 की उच्च स्तरीय बैठक में प्रकाशित किया गया। यह डॉक्यूमेंट एक धारणीय भविष्य के लिए एक साझा दृष्टि को दर्शाता है, जो सुचारू रूप से सुनियोजित और अच्छी तरह से व्यवस्थित किए गए शहरीकरण पर केन्द्रित है।
परमधर्मपीठीय मिशन के सन्देश में कहा गयाः “जब शहरों को एकात्मता, सबको साथ लेकर चलने और सर्वाधिक ज़रूरतमंद लोगों की देखभाल की दृष्टि से निर्मित किया जाता है, तो वे सिर्फ़ रहने और काम करने की जगह से कहीं अधिक उपयोगी स्थल बन जाते हैं; वे मुलाकात, भाईचारे और आशा के स्थल बन जाते हैं।”
मिशन ने यह भी स्मरण दिलाया गया कि बेघर होने से बुनियादी मानवाधिकारों के उपयोग की क्षमता कमज़ोर होती है।
लोगों की केन्द्रीयता
परमधर्मपीठीय प्रतिनिधिमण्डल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समय में मानव सुरक्षा पर सन्त पापा लियो 14 वें के विश्व पत्र मानिफिका ह्यूमानितास का उल्लेख किया ताकि यह याद दिलाया जा सके कि “विकास तब सही मायने में मानवीय होता है जब वह लोगों को केन्द्र में रखता है।”
प्रतिनिधिमण्डल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “इस सिद्धान्त को आने वाले दशक में नवीन शहरी कार्यसूची को लागू करने में मार्गदर्शक होना चाहिये।।” प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि जब शहरी विकास की बात आती है तो बेघर होना “मानव सम्मान एवं मानव प्रतिष्ठा का एक बड़ा अपमान” है।
परामर्श
परमधर्मपीठीय प्रतिनिधिमण्डल ने शहरों और देशों को “किफ़ायती और सही घरों के साथ-साथ एकीकृत सामाजिक सेवाएँ उपलब्ध कराने और बेघर होने के मूल कारणों जैसे “गरीबी, बेरोजगारी, नशीली दवाओं की लत, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक विघटन, विस्थापन और संघर्ष आदि को संबोधित करने का परामर्श दिया।
परमधर्मपीठीय प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि यह “स्थानीय समुदायों, नागर समाज, धार्मिक संगठनों” और उन लोगों की सार्थक भागीदारी के ज़रिए किया जाना चाहिए जिन्होंने खुद बेघर होने का अनुभव किया है। सन्देश में कहा गया कि शहरी विकास को केवल ऊँची-ऊँची इमारतों या उसके आर्थिक विकास से परखा नहीं जा सकता बल्कि इसकी क्षमता हर व्यक्ति को समाज में पूरी भागीदारी देने और आम भलाई में योगदान देकर फलने-फूलने में सक्षम बनाने से आँकी जा सकती है, क्योंकि हर शहर लोगों का एक समुदाय है, जिनमें से हर एक को ईश प्रदत्त सम्मान प्राप्त है।
