सीसीबीआई की कार्यकारी समिति की 100वीं बैठक, नवीकृत सिनॉडल भविष्य की ओर देखा

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीसीबीआई) ने अपनी कार्यकारी समिति की 100वीं सभा के साथ एक ऐतिहासिक मील के पत्थर पर पाँव रखा। सीसीबीआई के अध्यक्ष कार्डिनल फिलिप नेरी फेराओ ने इस मौके को बीते कल के लिए शुक्रिया अदा करने और भविष्य के लिए नई उम्मीद एवं दर्शन का पल बताया।

अपने भाषण में, कार्डिनल फिलिप नेरी ने सीसीबीआई की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि इसकी पहली कार्यकारी समिति की मीटिंग 14 अप्रैल 1988 को केरल के कोट्टायम में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता महाधर्माध्यक्ष साइमन पिमेंटा ने की थी। उस ऐतिहासिक बैठक के दौरान, कलकत्ता के महाधर्माध्यक्ष हेनरी डिसूजा को सीसीबीआई का तदर्थ संयोजक (एड हॉक कन्वीनर) चुना गया था।

सीसीबीआई की पहली महासभा 22 अप्रैल 1988 को कोट्टायम में हुई थी, जिसने औपचारिक रूप से भारत में लैटिन काथलिक कलीसिया के जीवन और मिशन में एक नए अध्याय की शुरुआत की।

कार्डिनल फिलिप नेरी ने कहा, “1988 में उस छोटी सी शुरुआत से, हमने एक लंबा और यादगार सफर तय किया है।” उन्होंने याद किया कि कैसे सीसीबीआई ने दशकों में अपनी संरचना को मजबूत करके, अपने प्रेरितिक दृष्टिकोण को विकसित किया और भारत में कलीसिया एवं उसके मिशन के लिए अपनी सेवा को बढ़ाकर तरक्की की।

कार्डिनल ने सम्मेलन की पूरी यात्रा में सर्वशक्तिमान ईश्वर के मार्गदर्शन और कृपा के लिए उनका शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कार्यकारी समिति में काम करनेवाले पूर्व सदस्यों और धर्माध्यक्षों को सम्मानित किया, और सीसीबीआई के विकास के लिए उनके समर्पण, समझदारी और प्रज्ञा की याद की।

कार्डिनल फिलिप नेरी ने कहा, “यह 100वीं मीटिंग सिर्फ कुछ लोगों की खुशी का पल नहीं है। यह कृपा और जिम्मेदारी का पल है।”

सिनॉडल रास्ते के द्वारा सीसीबीआई पर पुनः विचार करना
इस महत्वपूर्ण सभा का विशेष ध्यान “एकता, सहभागिता और मिशन के लिए एक सिनॉडल मार्ग निर्माण: सीसीबीआई के पुनः विचार और पुनर्संरचना” नामक दस्तावेज पर विचार करना है।

कार्डिनल फिलिप नेरी ने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित दस्तावेज सिर्फ संरचना के बदलावों के बारे में नहीं है। बल्कि, यह सीसीबीआई को कलीसिया और समाज की बदलती सच्चाइयों पर अधिक असरदार तरीके से जवाब देने में मदद करना चाहता है।

यह दस्तावेज सम्मेलन को अपनी संरचना की जांच करने, सहयोग को मजबूत करने, कलीसिया होने के अपने सिनॉडल तरीके को और गहरा करने एवं उसे सौंपे गए मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने हेतु आमंत्रित करता है।

एक बार अनुमोदित होने के बाद, यह दस्तावेज आगामी सीसीबीआई महासभा के लिए तैयारी दस्तावेज के तौर पर काम करेगा, जो सभा की तैयारी में सोच-विचार, सलाह-मशविरा और समझदारी को दिशानिर्देश देगा। इसके बाद, यह दस्तावेज महासभा से निकलनेवाले फैसलों और निर्देशों को लागू करने में मार्गदर्शन करने के लिए एक कार्य दस्तावेज बन जाएगा।

कार्डिनल फिलिप नेरी ने सदस्यों से इस प्रक्रिया को “खुलेपन, विनम्रता और मेलजोल की सच्ची भावना” के साथ करने की अपील की, और उन्हें व्यक्तिगत चिंताओं से आगे बढ़कर यह समझने के लिए बढ़ावा दिया कि पूरी कलीसिया के लिए सबसे अच्छा क्या है।

इसलिए, 100वीं कार्यकारी की बैठक 1988 से सीसीबीआई के सफर को मनाने और इसके भविष्य के लिए समझदारी के एक अहम पल, दोनों को दिखाती है, क्योंकि सम्मेलन मेलजोल, भागीदारी और मिशन को मजबूत करना चाहती है और भारत में कलीसिया की बदलती प्रेरिताई की वास्तविकताओं पर ज्यादा असरदार तरीके से जवाब देना चाहती है।

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