पाकिस्तान में ख्रीस्तीय और मुस्लिम शांति हेतु प्रार्थना में एक साथ
लाहौर में एक अंतरधार्मिक प्रार्थना सभा में ख्रीस्तीय एवं मुस्लिम प्रतिनिधियों ने चालीसा एवं रमजान के दौरान पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान की सीमा पर हिंसा खत्म करने एवं शांति के लिए साझा प्रतिबद्धता को नवीनीकृत किया।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चल रहे झगड़े और हिंसा की वजह से दैनिक जीवन में हलचल मची हुई है। इसी बीच, पाकिस्तान के लाहौर में “शांति केंद्र” में अंतरधार्मिक सभा हुई। इसमें ख्रीस्तीय और मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधि बादशाही मस्जिद में इकट्ठा हुए। यह मस्जिद शहर की शाही मस्जिद है।
लाहौर महाधर्मप्रांत के विकार जनरल फादर आसिफ सरदार ने बताया कि यह सभा “शांति और एकता का चिन्ह है, खासकर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध के बीच।”
शांति के लिए एक जैसी प्रतिबद्धता
वाटिकन के फिदेस न्यूज एजेंसी के मुताबिक, विकार जनरल ने इस कार्यक्रम को एक “सपना” बताया क्योंकि उन्हें “दोनों समुदायों के बीच अंतरधार्मिक मेलजोल और शांति देखने को मिली।” यह सभा चालीसा काल और रमजान की अवधि में इन मुस्लिम और ख्रीस्तीय नेताओं को एक साथ लाई और इसमें इफ्तार भी शामिल था, जो रोजा खोलने का खाना होता है।
फादर सरदान ने बतलाया कि कार्यक्रम दोनों समुदायों के आध्यात्मिक मेल-जोल और “युद्ध की वजह से इस मुश्किल समय में शांति के लिए साझा प्रतिबद्धता” को पक्का करने के लिए था, जो सीधे हम पर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि उपवास, प्रार्थना और दान पर ध्यान देने का मतलब है उन लोगों के साथ रोटी बांटना जिनके पास कुछ नहीं है, न्याय, शांति और मेल-मिलाप को बढ़ावा देना।
सभा के दौरान, लाहौर में शांति केंद्र के प्रमुख और दोमिनिकन फादर जेम्स चन्नन ने मस्जिद के इमाम अब्दुल खबीर आजाद के साथ “पाकिस्तान में ख्रीस्तीयों और मुसलमानों के बीच रिश्तों की जड़ें गहरी करने,” “रमजान और चालीसा दोनों में उपवास, चिंतन और त्याग के साझा मूल्यों को जीने,” और “शांति के लिए प्रार्थना करने, पाकिस्तान की स्थिरता और दुनिया भर के झगड़ों के समाप्त होने के लिए ईश्वर से मिलकर प्रार्थना करने” की प्रतिबद्धता साझा की।
दोमिनिकन पुरोहित ने दोहराया कि यह अंतरधार्मिक सभा आपसी सम्मान का एक ठोस उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा, “हमने एक साफ संदेश दिया है: विश्वास एकता का पुल हो सकता है, न कि बांटने की दीवार।”
एक स्पष्ट अपील
पाकिस्तान में हुई प्रार्थना सभा इन दिनों की यह एकमात्र घटना नहीं है काथलिक समुदाय ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर शांति के लिए एक मोमबत्ती जुलूस और प्रार्थना सभा भी की। पेत्रोलचिना के संत पियो को समर्पित गिरजाघर के धर्मसंघी और पल्ली समुदाय ने क्रूस रास्ता प्रार्थना की।
पाकिस्तान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सामाजिक संचार आयोग के कार्यकारी सचिव फादर कैसर फिरोज ओएफएम कैप और अपोस्तोलिक कार्मेलाइट की सुपीरियर सिस्टर अज़मत ने सभा का संचालन किया।
फादर फिरोज ने जोर देकर कहा कि संदेश स्पष्ट है: वे दोनों देशों के बीच हिंसा की निंदा करते हैं और बातचीत के जरिए युद्धविराम का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “तालिबान की अति हिंसा एक नुकसान पहुंचाने वाली सोच है,” “इसे रोकने और बदलने के लिए विश्वासियों को एक साथ काम करने की जरूरत है।”
इसके अलावा, उन्होंने इंटरनेशनल सुंदाय को लड़ाई खत्म करने और शांति लाने में मदद करने की उसकी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने अपील की कि “शांति पूरी मानव जाति का एक समान लक्ष्य और रूचि हो।”