पुरोहितों से पोप : भले चरवाहे के साक्षी बनें और उन्हें अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करें
पुरोहितों के पवित्रीकरण के लिए प्रार्थना दिवस के अवसर पर पोप लियो 14वें ने एक संदेश प्रकाशित करते हुए पुरोहितों को आमंत्रित किया कि वे “भले चरवाहे की कोमलता का साक्ष्य दें” और एक ऐसा पुरोहिताई जीवन जीयें जो "अविचल और येसु के हृदय के अनुरूप हो।"
पोप लियो ने अपने संदेश में पुरोहितों से कहा, “आइए हम जो कुछ करते हैं और हमारे साथ हर दिन जो कुछ भी होता है, हर चीज में मसीह के साथ एक रहें।"
पोप ने अपना संदेश 12 जून को पुरोहितों के पवित्रीकरण के लिए प्रार्थना दिवस के अवसर पर दिया, जब कलीसिया पवित्रतम हृदय का महापर्व मनाती है।
अपने संदेश में, पोप ने कहा कि पवित्रता न तो "कई विकल्पों में से एक" है और न ही "कोई अमूर्त विचार", क्योंकि इसमें हर उस इंसान की पहचान शामिल है जो पुनर्जीवित प्रभु के जीवन में हिस्सा लेना चाहता है।
प्रभु के प्रति भरोसे के साथ खुद को समर्पित करना
इस बात पर जोर देते हुए कि ईश्वर हमें अपनी पवित्रता के सहभागी होने के लिए बुलाते हैं, पोप लियो ने कहा कि जो पवित्रता वे हमसे चाहते हैं, वह "भरोसे के साथ खुद को समर्पित करना है, जिससे हम खुद को पवित्र आत्मा को बदलने दें।"
पोप ने कहा कि हमें ईश्वर की पवित्रता के सहभागी होने के लिए बुलाया गया है, भले ही हम दुनियावी हों, अक्सर "कमजोर और अधूरे, दुर्बल एवं थके हों, और कभी-कभी घायल भी।"
इसलिए, उन्होंने प्रश्न किया, "इतना कमजोर मानव दिल इतनी बड़ी बुलाहट का प्रत्युत्तर कैसे दे सकता है?"
पोप लियो ने कहा कि हमारे दिल का ख्रीस्त के दिल से मिलना कुछ खास लोगों के लिए आरक्षित होने का अनुभव नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र, यूखरिस्तीय यात्रा है जो हमारे जीवन के हर दिन सामने आती है।
सक्रिय नवीनीकरण
उन्होंने कहा, "हमारे अभिषेक के द्वारा हम ख्रीस्त के बन गये हैं, फिर भी, हमें रोज दिन पवित्र मिस्सा अर्पित करने, प्रार्थना करने, ईश वचन पर चिंतन करने और अपने भाइयों एवं बहनों की विनम्र सेवा के द्वारा अपने अंदर कृपा के वरदान को हमेशा नया करना चाहिए।"
यह कहते हुए कि हमारी मानवता अलग-अलग हिस्सों में नहीं बंटी है, यहाँ तक कि समय या प्यार भी बर्बाद होता दिखता है, पोप कहते हैं, "प्रार्थना, प्रेरिताई, रिश्ते, थकान, खुशियाँ और नाकामियाँ, ये सभी खास जगहें बन जाती हैं जहाँ ईश्वर खुद को और अपने असीम प्रेम को प्रकट करते हैं।"
उन्होंने कहा कि जिस पुरोहित का दिल सीधा, सरल और पवित्र होता है, वह काम के बीच में भी चिंतनशील होता, मुश्किल समय में दयालु एवं निष्ठावान रहता, और खुद के वरदान में खुश रह सकता है।
पोप लियो ने जोर देकर कहा, "दुनिया को ऐसे पुरोहितों की बहुत जरूरत है जो सिर्फ बातें या कार्यक्रम न करें; इसे एक ऐसे दिल की साक्षात गवाही की जरूरत है जो मसीह की पवित्रता की मीठी खुशबू फैलाए।" उन्होंने कहा कि एक पुरोहित का जीवन "जो अविचल हो और येसु के दिल के समान हो," वह "एकता, शांति और दया की एक भरोसेमंद निशानी है।"
इस तरह, विभाजन और डर के इस दौर में, पोप लियो ने कहा, "हमें शांति स्थापित करनेवाले और अच्छे चरवाहे की कोमलता के गवाह बनना चाहिए जो बिखरे हुए लोगों को इकट्ठा करना और घायलों को ठीक करना जानता है।"
पूर्णता की कोशिश करना नहीं
पोप लियो ने कहा, "पवित्रता के बुलावे का जवाब वैराग्य या पूर्ण बनने की कोशिश करने में उतना नहीं है - हालांकि ये आवश्यक हैं - बल्कि येसु के छिदे दिल में दिखे प्यार पर भरोसा करने में है।"
पोप को विस्मय होती है कि अब हम नहीं जीते, बल्कि मसीह हम में जीते हैं।"
पोप लियो ने कहा, "खुद को पूरी तरह उन्हें सौंप दें, ताकि आप उनके लोगों से उसी प्यार से प्यार कर सकेंगे जिस प्यार से वे उनसे प्यार करते हैं।"
उन्होंने कहा, “यह प्यार एक वादा है और गारांटी कि यदि हम अपने आपको समर्पित करते हैं और उन्हें पूरी तरह दे देते हैं तो कुछ भी नहीं खोयेगा।
अंत में, पोप लियो ने सभी पुरोहितों को कुँवारी मरियम की मध्यस्थता को सिपूर्द किया। उन्होंने कहा, "जिन्होंने अपने बेटे के रहस्य को अपने दिल में संजोया, वे हमें भी सिखाए कि हम दुनिया के उद्धारकर्ता, ख्रीस्त के दिल को जीवित रखें और उसे अपने अंदर धड़कने दें।"