मानव तस्करी मानवता के खिलाफ अपराध :पोप लियो
मानव तस्करी के विरुद्ध 12 वें विश्व दिवस के अवसर पर पोप लियो 14 वें ने एक सन्देश जारी कर काथलिक कलीसिया की “मानवता के विरुद्ध इस गंभीर अपराध” का सामना करने और इसे समाप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
मानव तस्करी के विरुद्ध
आठ फरवरी को मनाये जानेवाले मानव तस्करी के विरुद्ध 12 वें चेतना जागरण एवं प्रार्थना दिवस की पूर्व सन्ध्या पोप लियो 14 वें ने इस आधुनिक गुलामी की कड़ी निंदा की, जिसने हमारे ऑनलाइन समाज में और भी ज़्यादा परेशान करने वाला रूप ले लिया है। अपने सन्देश में उन्होंने कलीसिया की “मानवता के खिलाफ इस गंभीर अपराध का सामना करने और इसे खत्म करने की ज़रूरी अपील” को दोहराया।
पोप ने पुनर्जीवित प्रभु ख्रीस्त के शब्दों को दुहराते हुए कहा, "तुम्हें शांति मिले," उन्होंने कहा कि ये शब्द कहना "एक नई मानवीयता की ओर हमारा मार्ग प्रदर्शित करता है।" उन्होंने कहा, “सच्ची शांति प्रत्येक मनुष्य को ईश्वर से मिली प्रतिष्ठा को पहचानने और उसकी रक्षा करने से शुरू होती है”, इसके बावजूद “बढ़ती हिंसा के युग में, कई लोग अपना दबदबा कायम करने के लिए हथियारों के ज़रिए शांति पाने की कोशिश करते हैं।” उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इंसानों को अक्सर युद्ध में सिर्फ़ नुकसान माना जाता और राजनैतिक या आर्थिक लाभ के लिए उन्हें कुर्बान कर दिया जाता है।
महिलाएँ एवं बच्चे प्रभावित
सन्त पापा लियो ने कहा कि मानव जीवन की यही अनदेखी मानव तस्करी यानि कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग को बढ़ावा देती है, क्योंकि हथियारों की लड़ाई और भौगोलिक-राजनैतिक अस्थिरता तस्करों को एक जगह से दूसरी जगह पलायन करते लोगों के शोषण का मौके देती है। उन्होंने कहा, “इस टूटी हुई सोच में और इस घिनौने धंधे से सर्वाधिक दुष्प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है।”
“साइबर स्लेवरी” या इनटरनेट के प्रति बढ़ती गुलामी की ओर भी सन्त पापा ने ध्यान आकर्षित कराया जिसमें लोग ऑनलाइन स्कीम्स, मादक पदार्थों की तस्करी और धोखाधड़ी जैसी अपराधिक गतिविधियों में फंस जाते हैं। उन्होंने कहा, “पीड़ित व्यक्ति को अपराधी की भूमिका निभाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनके मन के घाव और गहरे हो जाते हैं।”
उन्होंने कहा, "हिंसा के ये रूप अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी संस्कृति के लक्षण हैं जो येसु मसीह की तरह प्रेम करना भूल गई है। ऐसी पीड़ा और सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हुए, ख्रीस्त के अनुयायियों को प्रार्थना और जागरूकता की ओर रुख करना चाहिए।"
प्रार्थना का महत्व
पोप ने कहा, प्रार्थना वह “छोटी सी लौ” है जो हमें अन्याय और बेपरवाही का विरोध करने की ताकत देती है, जबकि जागरूकता हमें समुदायों और डिजिटल जगहों पर शोषण करने वाले निकाय को पहचानने तथा उनसे उबरने में मदद करती है। उन्होंने कहा, “अन्ततः, मानव तस्करी की हिंसा को सिर्फ़ एक नई सोच के ज़रिए ही दूर किया जा सकता है, जो प्रत्येक मानव व्यक्ति को ईश्वर की प्रिय सन्तान मानती है।”
पोप लियो 14 वें ने उन अनेक लोगों और नेटवर्क के प्रति आभार व्यक्त किया जो मानव तस्करी के पीड़ितों की मदद करने के लिए काम करते हैं। उन्होंने मानव तस्करी के विरुद्ध प्रार्थना दिवस को सन्त जोसफीन भगिता की मध्यस्थता के सिपुर्द किया जो खुद भी इस मुसीबत से बची थीं। उन्होंने कहा कि सन्त भगिता “प्रभु में आशा की एक शक्तिशाली गवाह हैं, जिन्होंने अंत तक उनसे प्रेम किया।”
पोप ने सभी को आमंत्रित किया कि वे एक साथ मिलकर “एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ें जहाँ शांति का अर्थ सिर्फ़ युद्ध की अनुपस्थिति न हो, बल्कि ‘बिना हथियार के’ शांति हो, जो सभी की प्रतिष्ठा के पूर्ण सम्मान पर आधारित हो।”