देवदूत प्रार्थना में पोप : ईश्वर हमें नहीं त्यागेंगे

धन्यताओं की घोषणा के बाद येसु के शब्दों पर चिंतन करते हुए, पोप लियो 14वें ने येसु से मुलाकात में मिलनेवाली सच्ची खुशी, स्वाद और दीपक पर प्रकाश डाला।

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में संत पापा लियो 14वें ने रविवार 8 फरवरी को, भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पू्र्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।

“धन्यताओं की घोषणा के बाद येसु ने उन लोगों को सम्बोधित किया जो उनका पालन करते हैं, यह कहते हुए कि पृथ्वी अब पहले जैसी नहीं रही और दुनिया अब अंधेरे में नहीं है, क्यों “तुम पृथ्वी के नमक हो...तुम संसार की ज्योति हो।” (मती.5:13-14)  

पोप ने कहा, “सचमुच, यह सच्ची खुशी है जो जीवन में स्वाद लाती और ऐसी चीज को सामने लाती है जो पहले नहीं थी। यह खुशी जीवन जीने के तरीके से आती है, पृथ्वी पर रहने और साथ रहने के तरीके से, जिसे चुनना चाहिए। यही जीवन है जो येसु में चमकती है, उनके शब्दों और कामों के नये स्वाद में। येसु से, उनके मन की दीनता, उनके दिल की नरमी और सादगी, न्याय के लिए उनकी भूख और प्यास में मुलाकात के बाद, जो दया और शांति को बदलाव और मेल-मिलाप की ताकत के तौर पर सामने लाती है, यदि कोई व्यक्ति इन सबसे खुद को दूर रखना चाहता है, तो वह फीका और उदासीन होगा।

अंधकार में एक प्रकाश
संत पापा ने नबी इसायस के ग्रंथ का हवाला दिया जहाँ अन्याय दूर करने के लिए ठोस कदम बताए गये हैं: भूखों के साथ रोटी बांटना, गरीबों और बेघर लोगों को अपने घर लाना, नंगे को कपड़े पहनाना, अपने पड़ोसियों और अपने घरों में रहनेवालों को नजरअंदाज नहीं करना। (इसा. 58:7) नबी आगे कहते हैं, “तब तुम्हारी ज्योति उषा की तरह फूट निकलेगी और तुम्हारा घाव शीघ्र ही भर जायेगा। तुम्हारी धार्मिकता तुम्हारे आगे-आगे चलेगी और ईश्वर की महिमा तुम्हारे पीछे-पीछे आती रहेगी।”(पद. 8)

एक तरफ प्रकाश है जिसे छिपाया नहीं जा सकता क्योंकि यह सूरज की तरह महान है जो हर सुबह अंधेरे को दूर भगाता है; दूसरी तरफ एक घाव है जो कभी ताजा था और अब भर रहा है।

पिता हमारा नाम जानते हैं
स्वाद खोना और खुशी त्याग देना दुखद है, फिर भी किसी के दिल में यह घाव हो सकता है। ऐसा लगता है कि येसु उन्हें चेतावनी दे रहे हैं जो उनकी बात सुनते हैं कि वे खुशी न त्यागें। वे कहते हैं कि जिस नमक का स्वाद चला गया है, वह “किसी काम का नहीं रहता, बल्कि उसे फेंक दिया जाता और पैरों तले रौंदा जाता है।” (मती. 5:13) कितने लोग, महसूस करते हैं कि वे अयोग्य हैं अथवा टूटे हुए हैं। मानो कि उनके लिए प्रकाश छिप गया हो। लेकिन, येसु एक ऐसे ईश्वर की घोषणा करते हैं जो हमें कभी नहीं छोड़ेंगे, एक पिता जो हमारे नाम और हमारी पहचान की परवाह करते हैं। हर जख्म, यहाँ तक कि सबसे गहरा जख्म भी, धन्यताओं को अपनाने और सुसमाचार के रास्ते पर चलने से ठीक हो जाएगा।

खुशी पुनः जागेगी
इसके अलावा, दूसरों के लिए खुलेपन और ध्यान देने से खुशी फिर से जागेगी। किन्तु पोप सावधान करते हैं कि सादगी का जीवन अपनाने के कारण हम दुनिया से अलग हो सकते हैं। येसु ने खुद निर्जन प्रदेश में, दूसरे रास्ते अपनाने, अपनी पहचान बनाने, अपनी प्रशंसा कराने और दुनिया को अपने चरणों में करने के प्रलोभन झेले। फिर भी उन्होंने उन रास्तों को ठुकरा दिया जिनसे उनका असली स्वाद खो जाता, वह स्वाद जो हमें हर रविवार को तोड़ी गई रोटी में मिलता है, जो एक दिया हुआ जीवन और एक शांत प्यार है।

भाइयो और बहनो, आइए, हम येसु से मुलाकात कर शक्ति और ज्ञान पाएँ। यदि हम घमंड नहीं करेंगे तो एक पहाड़ी पर बसे शहर की तरह होंगे, जो सिर्फ दिखता नहीं, बल्कि बुलाता और स्वागत भी करता होगा: ईश्वर का शहर जहां हर कोई, दिल से, रहना और शांति पाना चाहता है। आइए, अब हम अपनी नजरें और प्रार्थनाएँ स्वर्ग के द्वार, माता मरियम की ओर उठायें कि वे हमें अपने बेटे के शिष्य बनने और बने रहने में मदद करें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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