कैथोलिकों ने विदेशी चंदे से जुड़े नए नियमों के विरोध में प्रार्थना और उपवास किया

पूरे भारत में कैथोलिकों ने 28 जून को प्रार्थना और विरोध के दिन के तौर पर मनाया। उन्होंने विदेशी चंदा लेने से जुड़े नए सरकारी नियमों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इन नियमों से ईसाइयों के चैरिटी और सामाजिक कार्यों पर असर पड़ेगा।

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ़ इंडिया (CBCI) की ओर से यह अपील तब की गई, जब गृह मंत्रालय ने 22 जून को फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA), 2010 को सुव्यवस्थित करने के लिए नए नियमों की घोषणा की।

इन प्रस्तावित नियमों का मकसद विदेशी चंदा लेने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) पर नियमों का पालन करने की सख्त शर्तें लागू करना और नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाना है।

सरकार का कहना है कि नए उपाय - जिनमें राजनीतिक गतिविधियों पर रोक भी शामिल है - राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और विदेशी फंड के इस्तेमाल में ज़्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं।

हालांकि, चर्च के नेताओं का तर्क है कि इन नियमों से प्रशासनिक मुश्किलें पैदा होंगी, जिससे उनके द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों, अस्पतालों, कल्याणकारी संस्थाओं और अन्य सामाजिक सेवा कार्यों में बाधा आ सकती है।

नेशनल बिशप्स कॉन्फ्रेंस के नई दिल्ली स्थित केंद्र में, डिप्टी सेक्रेटरी जनरल फादर मैथ्यू कोयिकल ने शुरुआती प्रार्थना का नेतृत्व किया और देश के नेताओं व नागरिकों के लिए ईश्वर से मार्गदर्शन और बुद्धि की कामना की।

पादरी, धार्मिक बहनें और भाई, स्टाफ़ सदस्य और आम श्रद्धालु 'ब्लेस्ड सैक्रामेंट' के सामने दिन भर चली मौन 'यूकेरिस्टिक एडोरेशन' (पवित्र संस्कार की आराधना) में शामिल हुए।

चर्च के नेताओं ने कहा कि यह पहल आस्था का शांतिपूर्ण इज़हार और न्याय, सद्भाव, धार्मिक स्वतंत्रता और भारत के सभी लोगों की भलाई के लिए प्रार्थनापूर्ण अपील थी।

चर्च के अधिकारियों ने कहा कि देश भर के धर्मप्रांतों (डायोसिस) में इसी तरह के आयोजन ईसाई समुदायों की एकता को दर्शाते हैं।

हैदराबाद के आर्चबिशप और कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष कार्डिनल एंथनी पूला ने देश भर के पैरिश (चर्च क्षेत्रों) को भेजे एक सर्कुलर में कहा, "भारत में चर्च ने हमेशा समाज की, खासकर गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों की सेवा की है, जो गॉस्पेल (सुसमाचार) के मूल्यों का ही एक रूप है।"

चर्च के नेताओं ने बताया कि हाल के वर्षों में 21,900 से ज़्यादा NGO के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। इनमें कई प्रमुख कैथोलिक संगठन भी शामिल थे, जैसे कि तमिलनाडु सोशल सर्विस सोसाइटी और जेसुइट रिसर्च संस्थान। हिंदू-समर्थक भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने शुरू में 1 अप्रैल को संसद में FCRA में संशोधन के साथ नए नियम पेश करने की योजना बनाई थी। लेकिन राजनीतिक विरोध और जनता की आलोचना के कारण सरकार को इस बिल को संसद के आगामी मॉनसून सत्र (जो जुलाई में होना है) तक टालना पड़ा।

ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एलियास वास ने 29 जून को UCA न्यूज़ को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया "अल्पसंख्यक समूहों पर हमला करने की एक सोची-समझी चाल लगती है।"

उन्होंने कहा कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए इस तरह की पाबंदियां लगाना एक खतरनाक चलन है।