कार्डिनल जुप्पीः शांति हेतु हाथों और हृदयों को हथियार मुक्त करें
आस्सीसी के संत फ्रांसिस की मृत्यु की 800वीं सालगिरह कार्डिलन मात्तेयो जुप्पी ने यूख्रारीस्तीय बलिदान अर्पित करते हुए अपने में प्रवचन में कहा कि “हम सत्ता की एक भद्दी, दबंग और धोखेबाज़ संस्कृति के लोभ और बहकावे में पड जाते हैं”, जिसे “बड़े आर्थिक हितों” और “राष्ट्रवाद” से भी बढ़ावा मिलता है; शांति “हमसे ही शुरू होती है और यही एकमात्र संभव भविष्य है”। आगे बढ़ने का रास्ता यही है कि हम “अपने हाथों और हृदयों” को हथियार मुक्त करें।
कार्डिनल मात्तेयो जुप्पी ने आस्सीसी के संत फ्रांसिस की मृत्यु की 800वीं सालगिरह का ख्रीस्तीयाग अस्सीसी के महागिरजाघर में अर्पित किया।
युद्ध के कारण विश्व में बिखराव की स्थिति को संर्दभित करते हुए उन्होंने कहा “जब शांति सभों का आलिंगन करती केवल तब वह सच्ची शांति होती है।” आज दुनिया भंयकर युद्धों से ग्रस्ति है, एक पागलपन जो सभों को पागल करते जान पड़ती है।
इस अवसर पर आस्सीसी के संत फ्रांसिस का महागिरजाघऱ विश्वासियों की उपस्थिति से खचाखच भरा था, जिसमें इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला के साथ-साथ इटली और कई अन्य देशों के सरकारी प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
कोई नहीं खोता, शत्रु भी नहीं
संत फ्रांसिस आस्सीसी आज भी बहुत प्रासंगिक हैं; वे लोगों को धारा के विपरीत चलने और मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करते हैं, जैसा कि पिछले अगस्त, आस्सीसी की अपनी यात्रा के दौरान संत पापा लियो 14वें ने अपने संबोधन में कहा था। कार्डिनल जुप्पी ने कहा कि संत फ्रांसिस हमें प्रभु की उपस्थिति को “देखने में मदद करते हैं” और हमें “उनकी इच्छा पूरी करने” के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं, जिसके अनुसार कोई भी खोया हुआ नहीं है, “यहाँ तक कि दुश्मन भी नहीं”।
कार्डिनल ज़ुप्पी ने वर्तमान समय के “खतरनाक” परिस्थिति पर विचार करते हुए कहा कि “हम सत्ता की एक भद्दी, दबंग और धोखेबाज़ संस्कृति की लालच और बहकावे में आ जाते हैं; जिसे गलत प्राथमिकताओं, खुलेआम और बड़े आर्थिक हितों, राष्ट्रवाद और ऐसे अभियानों से बढ़ावा मिलता है जो जोड़ने वाली चीज़ों को खोजने के बदले हमें तोड़ते हैं।” उन्होंने कहा कि विकास के मार्ग में बढ़ने का रास्ता हमारे लिए यही है कि हम “अपने हाथों और अपने दिलों” को निहत्था करें।
सरलता छिछलापन नहीं
फ्रांसिस जो विनम्र, शालीनता और अहंकारहीन हैं “ताकतवर लोगों के अहंकार को कम” कर सकते हैं। वे हर किसी से बातें करते हैं क्योंकि उनका विश्वास किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सभों के लिए प्रेम से भरा है।”
उनकी सरलता, जो न तो “ऊपरी दिखावा है और न ही बाहरी रूप-रंग की गुलामी”, अपने में उन बातों को वहन करती है- “जो आँखों से दिखाई नहीं देतीं, फिर भी सब कुछ को स्पष्ट, सत्य, कीमती और ज्योतिर्मय बनाती है- यहाँ तक कि बीमारी और मौत के भयानक, निराशाजनक अंधेरे को भी”।
कार्डिनल ने कहा कि वे हमें याद दिलाते हैं कि “शांति और न्याय ही एकमात्र ऐसी चीजें हैं जिसके लिए हमें काम करना चाहिए”, “क्योंकि सिर्फ़ यही हमें हर सही मकसद को खोजने और उसकी रक्षा करने में मदद करते हैं” युद्ध हमारे जीवन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि हम शांति कायम करने हेतु बनाये गये हैं जिसकी शुरुआत हमसे ही होती है।” उन्होंने कहा कि प्रेम करने का अर्थ देना है,“अपने पड़ोसियों के लिए आनंद लाने से बड़ी हमारे लिए कोई खुशी नहीं है, जिसकी शुरूआत हम गरीबों से करते हैं।” अतः हमें गरीबों को अपने भाई-बहनों के रुप में देखने की जरुरत है।
मानवता की जडे़ें
कार्डिनल ने आगे कहा कि संत फ्रांसिस हमें “इटली की सबसे गहरी साझा जड़ों को खोजने” में मदद करते हैं। ये जड़ें “हमें मानव बनाती हैं और हमें ऐसी संस्कृति से भरती हैं जो ख्रीस्त से आती है और हमें उनकी ओर अग्रसर करती है, इसे हमें प्रार्थना और सेवा के माध्यम पोषित करने की आवश्यकता है-एक ऐसा काम जो हर कोई कर सकता है”।
संत फ्रांसिस हमें विनम्रता में शांति के वाहक और शांति के निर्माता होने को निमंत्रण देते हैं, जो साहस में लोगों को “एक साथ रहने” का आहृवान करता है जो “शक्ति के कानून को थोपने के बजाय कानून के शासन से शक्तिशाली होने में हमें मदद करता है।”
