पोप ने नाईजीरिया में घातक हमले की निंदा की
देवदूत प्रार्थना के उपरांत पोप ने नाईजीरिया में घातक हमले के लिए दुःख और चिंता व्यक्त की, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई है।
पोप लियो 14वें ने हमलों के शिकार लोगों के लिए संवेदना प्रकट करते हुए कहा, “मुझे दुःख और चिंता के साथ पता चला कि नाइजीरिया में हाल ही में अलग-अलग समुदायों पर हमले हुए हैं, जिनमें बहुत ज्यादा जानें गई हैं। मैं हिंसा और आतंकवाद के सभी पीड़ितों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूँ। मुझे उम्मीद है कि सही अधिकारी हर नागरिक की जान की सुरक्षा और बचाव सुनिश्चित करने के लिए पक्के इरादे से काम करेंगे।”
फिर संत जोसेफिन बखिता की याद करते हुए, जिनका पर्व 8 फरवरी को मनाया जाता है और जब मानव तस्करी के खिलाफ प्रार्थना एवं चिंतन दिवस भी मनाया जाता है, संत पापा ने कहा, “मैं उन सभी धर्मसंघी महिलाओं और लोगों को धन्यवाद देता हूँ जो गुलामी के मौजूदा रूपों से लड़ने और उन्हें खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके साथ, मैं कहता हूँ: शांति की शुरुआत प्रतिष्ठा से होती है!”
उसके बाद बाढ़ पीड़ितों की याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैं पुर्तगाल, मोरक्को, स्पेन और दक्षिणी इटली के लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ, जो बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हैं। मैं समुदायों को कुँवारी मरियम की ममता भरी सुरक्षा के साथ एकजुटता और एकता में रहने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ।”
देवदूत प्रार्थना में पोप ने नये धन्य की भी याद, जिनकी धन्य घोषणा शनिवार को स्पेन में हुई। पोप ने कहा, “कल स्पेन के हुएर्कल-ओवेरा में, दोन सल्वातोर वलेरा पार्रा धन्य घोषित किये गये, जो एक पल्ली पुरोहित थे और अपने लोगों के लिए पूरी तरह समर्पित थे। वे विनम्र थे और अपनी प्रेरितिक उदारता पर ध्यान देते थे। एक पुरोहित के रूप में उनका उदाहरण, जो आवश्यक चीजों पर ध्यान देते थे, आज के पुरोहितों को अपने दैनिक जीवन में वफादार रहने, सादगी और सरलता से जीने के लिए प्रेरित करे।”
तत्पश्चात् पोप ने देश-विदेश से आये सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया एवं पुनः शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील दोहरायी, और कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि आर्थिक और सैन्य ताकत की प्रणाली मानव को भविष्य नहीं देतीं। भविष्य लोगों के बीच सम्मान और भाईचारे में है।
अंत में, उन्होंने सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ दीं।