देवदूत प्रार्थना में पोप : ईश्वर का राज्य प्रेम से चुपचाप बढ़ता है, बल से नहीं

रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान अपने संदेश में संत पापा लियो 14वें ने ईश्वर के राज्य पर चिंतन किया जो विनम्रता, धैर्य और प्रेम के द्वारा चुपचाप बढ़ता है न कि बल से। पोप ने ख्रीस्तीय को ईश्वर के छिपे कार्यों पर भरोसा रखने और दुनिया में सुसमाचार के छोटे बीज बनने का प्रोत्साहन दिया।

पोप लियो 14वें ने रविवार 19 जुलाई को कास्तेल गंदोल्फो में देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उपस्थित विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।

फिर रविवार के सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए उन्होंने कहा, “बीज बोनेवाले के दृष्टांत के बाद येसु भीड़ को सम्बोधित करना जारी रखते हैं, इसके लिए कई छवियों का सहारा लेते हैं : अच्छा गेहूँ और जंगली पौधे, सरसों के बीज और आटे में खमीर।” (मती. 13:24–43)

ये तीनों छोटे दृष्टांत, इतिहास में ईश्वर के राज्य के आने, मानव जीवन में उसके काम करने के तरीके, और जिस तरह से वह बढ़ता, फैलता और दुनिया को अंदर से बदलता है, उसे याद दिलाती हैं। इन छवियों के द्वारा, येसु हमें उस सोच में पड़ने के प्रलोभन से बचने की चेतावनी देते हैं कि ईश्वर एक ताकतवर इंसान है जो खुद को जबरदस्ती थोपते, जो कब्जा करते और हावी होते हैं, या जो विजयी रूप में आते हैं। इसके विपरीत, ईश्वर छोटापन पसंद करते है, जो उनके समझदार प्यार की निशानी है, जिसके द्वारा वे हमें स्वतंत्र छोड़ते हैं कि हम उन्हें मानें या न मानें। उनका प्यार जंगली पौधों के बीच भी अपनी उपस्थिति महसूस कराता है, सबसे छोटे बीज की तरह छिपे और अनदेखे तरीके से काम करता है, और बिना आवाज किए आटे को खमीरा बना देता है।

पोप को अनुसार कुछ लोगों की उम्मीद है कि ईश्वर अचानक दखल देंगे, और दुनिया से बुराई को तुरंत खत्म कर देंगे। लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि ऐसी उम्मीदें ख्रीस्तीय जीवन और कलीसिया के बारे में एक गलत सोच बना सकती हैं।

ईश्वर के प्रति हमारा दृष्टिकोण
संत पापा ने कहा, “भाइयो एवं बहनो, इन दृष्टांतों के द्वारा, येसु इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें बताते हैं कि ईश्वर हमारे जीवन और इतिहास में कैसे काम करते हैं। हम कभी-कभी उम्मीद करते हैं कि ईश्वर कुछ शानदार करेंगे; हम चाहते हैं कि वे ऊपर से आकर बुराई की जंगली घास को तुरंत जड़ से उखाड़ दें। हम एक मज़बूत और ताकतवर ईश्वर की कल्पना करते हैं, और दुर्भाग्य से, हम ख्रीस्तीय होने और कलीसिया होने का अपना तरीका भी इसी छवि पर बनाते हैं।” लेकिन, संत पापा ने कहा कि ईश्वर का राज जंगली घास के बीच भी फैलता है, जिसके लिए हमें अपने दृष्टिकोण को सही करने की जरूरत होती है ताकि हम बुराई के अंधेरे के बावजूद उगने वाली अच्छाई को पहचान सकें, और जल्दबाजी में फैसले लेने से बच सकें। यह सबसे छोटे बीज की तरह आता है और इसलिए इस प्रक्रिया के साथ हमें धैर्य रखने की जरूरत है, ताकि हम इसे दैनिक जीवन की छोटी-छोटी चीज़ों और सामान्य जीवन की सादगी में पहचान सकें। यह आटे में खमीर की तरह दिखता नहीं है, और इसलिए हम निराशा न हों और तब भी विश्वास रखें, जब ऐसा लगता हो कि ई्श्वर नहीं हैं। असल में, वे हमेशा हमारे साथ हैं, और उनका प्यार हमेशा हमारी मदद करने के लिए तैयार रहता है।

ईश्वर के काम करने का तरीका
“ईश्वर के काम करने का यह तरीका हमारा भी होना चाहिए जिसमें हम जीते हैं, एक व्यक्ति के रूप में और एक कलीसिया के रूप में, अपने आस-पास की सच्चाईयों के बीच।” हमें सुसमाचार पर ध्यान देनेवाला नजरिया अपनाने के लिए बुलाया गया है, अभिमानी फैसलों से दूसरों का जल्दबाजी में विरोध किए बिना, ताकत और बल से खुद को थोपे बिना, और ईश्वर के काम पर भरोसा खोए बिना। जैसा कि उस समय के कार्डिनल रतसिंगर ने कहा था, यह खुद को बीज के तर्क के आगे झुकाने की बात है — जो सफलता और महानता का नहीं, बल्कि खुद को छोटा बनाकर दूसरों की सेवा करने का है (प्रचारकों और धर्म शिक्षकों को संबोधन, 10 दिसंबर 2000)। इस तरह, हम सुसमाचार के छोटे बीजों की तरह बन जाएँगे जो अंकुरित होते, और प्यार के खमीर की तरह दुनिया के आटे को बदल देते हैं।

पोप ने कहा, “आइए, हम धन्य कुँवारी मरियम से प्रार्थना करें, जो अपने छोटेपन में वचन के बीज का स्वागत करना जानती हैं, कि वे हमारी यात्रा में हमें सहारा दें और हमारी मध्यस्थता करें।”

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।