शिक्षा और संस्कृति के लिए सीबीसीआई कार्यालय ने पहली राष्ट्रीय परिषद का उद्घाटन किया
शिक्षा और संस्कृति के लिए सीबीसीआई कार्यालय ने नई दिल्ली स्थित भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) सेंटर में, अपनी पहली राष्ट्रीय परिषद का उद्घाटन किया, जो भारत में काथलिक कलीसिया के शिक्षण प्रेरिताई को मजबूत करने में एक अहम मील का पत्थर होगा।
उद्घाटन समारोह ने देशभर में काथलिक शिक्षा के लिए सहयोग को मजबूत करने और एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने के लिए धर्माध्यक्षों, तीन स्वतंत्र कलीसियाओं के प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय काथलिक शैक्षिक संगठनों के नेताओं और नवगठित राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों को एक साथ लाया।
कार्यक्रम की शुरुआत माननीय यूजीन जोसेफ के नेतृत्व में आरंभिक प्रार्थना से हुई। जिसके बाद शिक्षा और संस्कृति के लिए सीबीसीआई के राष्ट्रीय सचिव फादर डॉ. मारिया चार्ल्स एसडीबी, ने स्वागत भाषण दिया। अध्यक्ष का भाषण प्रस्तुत करते हुए, माननीय एलियास गोंसाल्वेस ने भारत की बढ़ती शैक्षिक आवश्यकताओं के जवाब में एकता, नवाचार और मिशनरी प्रतिबद्धता के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रीय समिति के औपचारिक उद्घाटन से पहले शिक्षा और संस्कृति के लिए सीबीसीआई परिषद (ओईसी) के मिशन और गतिविधियों पर एक वीडियो प्रस्तुति दी गई।
सभा की एक खास बात थी राष्ट्रीय परिषद का घोषणापत्र प्रस्तुत करना और उसे मंजूरी देना। सिरो-मालाबार, सिरो-मलंकरा और लैटिन कलीसियाओं के प्रतिनिधियों ने शिक्षण प्रेरिताई के लिए अपनी प्रेरितिक योजनाएँ पेश कीं, जो काथलिक शिक्षा के लिए कलीसिया की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है। एआईएनएसीएस, जेवियर बोर्ड और एआईसीयूएफ जैसे राष्ट्रीय संगठन ने भी अपनी प्रेरिताई और भविष्य की प्राथमिकताएँ साझा कीं।
फादर डॉ. मारिया चार्ल्स ने राष्ट्रीय परिषद के बड़े प्रयासों को पेश किया, जिसमें शिक्षा 2026 पर राष्ट्रीय सलाहकार 2026, सीबीसीआई एजुबेस, सीबीसीआई एजुकेशन नेक्सस, सीबीसीआई ओईसी वेब पोर्टल, प्रांतीय एनिमेशन प्रोग्राम और पूरे भारत में काथलिक शिक्षण संस्थान को मजबूत करने के मकसद से नए प्रकाशन शामिल हैं।
सभा रांची के महाधर्माध्यक्ष माननीय बिशप विंसेंट आइंद की अगुवाई में प्रार्थना के साथ समाप्त हुई। पहली राष्ट्रीय परिषद का उद्घाटन भारत में अधिक मेलजोल बढ़ाने, काथलिक शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने और गुणवत्ता, मूल्य आधारित और बदलाव लानेवाली शिक्षा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
