बैंगलोर के आर्चबिशप ने लीड प्रतिभागियों को 'भविष्यदर्शी नेतृत्व' अपनाने का आह्वान किया
बेंगलुरु, 29 अक्टूबर 2026: 'लीड एकेडमी 2026' का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 अक्टूबर को सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम कलीसिया और समाज के लिए दूरदर्शी, सक्षम और दयालु नेताओं को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
अब तक इस पहल के माध्यम से 100 से अधिक नेता तैयार किए जा चुके हैं। 2026 के कार्यक्रम में लगभग 25 दिनों का एक कठोर, दो-चरणीय आवासीय मॉडल अपनाया गया था।
नेतृत्व विकास की एक अभूतपूर्व पहल, 'LEAD एकेडमी', पूरे भारत में चर्च के मध्य-स्तरीय नेताओं और शिक्षकों पर गहरा और परिवर्तनकारी प्रभाव डाल रही है।
इसका नेतृत्व हार्वर्ड के पूर्व छात्र और LEAD एकेडमी के संस्थापक फादर वी. एम. थॉमस कर रहे हैं। यह पहल बैंगलोर के 'मैरियन फाउंडेशन' (Marian Foundation) के साथ मिलकर चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य नेताओं को चिंतन, सेवा और मिशन-उन्मुख नेतृत्व के लिए आवश्यक कौशल और उपकरण प्रदान करना है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की शिक्षण परंपराओं और IAS प्रशिक्षण पद्धतियों से प्रेरित यह पहल, अकादमिक कठोरता और आध्यात्मिक गहराई का एक अनूठा संगम है। इसका लक्ष्य ऐसे नेताओं को तैयार करना है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहें और एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ नेतृत्व कर सकें।
पहला चरण जून-जुलाई में गुवाहाटी के 'डॉन बॉस्को इंस्टीट्यूट' में आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। दूसरा चरण 17 से 27 अक्टूबर तक बेंगलुरु के प्रमुख संस्थानों—जैसे 'होली क्रॉस सेंट आंद्रे होम', 'क्रिस्टु जयंती यूनिवर्सिटी' और 'सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज'—में चला। इसके साथ ही, प्रतिभागियों ने 'क्राइस्ट यूनिवर्सिटी' का दौरा भी किया।
प्रशिक्षण की एक समग्र यात्रा
इस पाठ्यक्रम में आधुनिक नेतृत्व रणनीतियों को आध्यात्मिक आधार के साथ जोड़ा गया है। प्रतिभागियों ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता (emotional intelligence), संस्थागत प्रशासन, वित्तीय जवाबदेही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बदलाव के जिम्मेदार प्रबंधन जैसे विषयों पर गहराई से काम किया।
'थ्योरी यू' (Theory U), 'इकिगाई' (Ikigai), 'ब्लू ओशन स्ट्रेटेजी' (Blue Ocean Strategy) और '360-डिग्री मूल्यांकन' जैसे व्यावहारिक शिक्षण उपकरणों का उपयोग करते हुए, एकेडमी ने सामान्य प्रशासनिक कार्यों से आगे बढ़कर 'परिवर्तनकारी नेतृत्व' (transformational leadership) की ओर बढ़ने पर जोर दिया।
एकेडमी के मूल सिद्धांतों को चार आधारभूत प्रतिबद्धताओं में परिभाषित किया गया है: सीखना और सुनना (Learn and Listen), सशक्त बनाना और जोड़ना (Empower and Engage), साथ चलना और कार्य करना (Accompany and Act), तथा समर्पित शिष्यत्व (Dedicated Discipleship)। आर्चबिशप का भविष्यदर्शी नेतृत्व (Prophetic Leadership) के लिए आह्वान
ग्रेजुएशन समारोह और समापन यूकेरिस्ट (प्रभु भोज) की अध्यक्षता करते हुए, बैंगलोर के आर्चबिशप पीटर मचाडो ने सच्चे ईसाई नेतृत्व के पाँच महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया:
साहस के साथ विफलता का सामना करना: स्वयं येसु ने अस्वीकृति, पीड़ा और क्रूस पर मिली विफलता का अनुभव किया था, फिर भी उसी अनुभव के माध्यम से पुनरुत्थान (Resurrection) की विजय प्राप्त हुई।
आर्चबिशप मचाडो ने कहा, "इसलिए, विफलता को यात्रा का अंत नहीं मानना चाहिए; यह बदलाव की शुरुआत बन सकती है।" उन्होंने नेताओं से विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहने की क्षमता (resilience) विकसित करने का आग्रह किया।
बदलाव के नबी (Prophets of Change): प्रतिभागियों को याद दिलाते हुए कि चर्च की संस्थाएँ मुनाफे के लिए काम करने वाले उद्यम नहीं हैं, उन्होंने जोर दिया कि नेताओं को उभरती जरूरतों को पहचानना चाहिए और अनिश्चितता के समय में आशा के वाहक के रूप में कार्य करना चाहिए।
विश्वास और जवाबदेही: इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि विश्वास ही संस्थागत प्रभावशीलता की नींव है, आर्चबिशप ने कहा, "नेताओं को विश्वास, ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक बनना चाहिए।"
आशा के संदेशवाहक: नेतृत्व को दूसरों के भीतर संभावनाओं को जगाने के कार्य के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने कहा कि लोगों को एकजुट करना मूल रूप से "मित्रता बढ़ाने" जैसा है—यानी रिश्ते बनाना, आत्मविश्वास जगाना और एक साझा लक्ष्य के लिए लोगों को एक साथ लाना।
निष्ठा के माध्यम से रचनात्मकता: मदर टेरेसा से प्रेरणा लेते हुए, उन्होंने जोर दिया कि बड़े बदलाव केवल असाधारण संसाधनों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों में निष्ठा रखने से शुरू होते हैं। उन्होंने कुछ यादगार बातें भी साझा कीं: "शिक्षा धन है, और स्वच्छता स्वास्थ्य है।"
इस यात्रा को जारी रखने के लिए, आर्चबिशप ने ग्रेजुएट होने वाले 'लीडर्स' (LEADers) को चार दैनिक आदतें अपनाने का सुझाव दिया: दूसरों की जरूरतों पर ध्यान देना, अपनी पिछली सफलताओं और विफलताओं से सीखने के लिए पीछे मुड़कर देखना, सहयोग के अवसरों को अपनाने के लिए अपने आस-पास देखना, और प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट मौन रहकर व प्रार्थना करके अपने भीतर झांकना।
LEAD अकादमी के लिए एक नया अध्याय
समापन समारोह में नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला, जहाँ सेल्सियन फादर बिन्नी मैनुअल को LEAD अकादमी के नए कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के रूप में नियुक्त किया गया, ताकि अकादमी के मिशन का विस्तार किया जा सके। संस्थापक-निदेशक सेल्सियन फादर थॉमस ने सभी मेजबान संस्थाओं, सहयोगियों और प्रतिभागियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।
जैसे-जैसे ये ग्रेजुएट्स भारत भर में अपने-अपने धर्मप्रांतों (dioceses) और धार्मिक समुदायों में लौट रहे हैं, वे अपने साथ एक साझा संकल्प लेकर जा रहे हैं: गहराई से सुनना, रचनात्मक रूप से सोचना, साहस के साथ कार्य करना और करुणा के साथ सेवा करना।
