त्रिची केंद्र में राष्ट्रीय लेटी सम्मेलन का आयोजन
त्रिची, 29 अक्टूबर, 2026: इंडियन बिशप्स कमीशन फॉर लेटी (भारतीय धर्माध्यक्षीय आयोग) ने 25 से 27 अक्टूबर, 2026 तक त्रिची स्थित तमिलनाडु लेटी फॉर्मेशन सेंटर में तीन दिवसीय 'राष्ट्रीय लेटी सम्मेलन' का आयोजन किया।
इस सम्मेलन का मुख्य विषय था- "संत देवसहायम: आज के आम विश्वासियों (लेटी) के लिए एक आदर्श"।
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के 'कमीशन फॉर लेटी' के फादर यूजीन जोसेफ और आयोग के सचिव एड्रियन रोसारियो ने इस कार्यक्रम का संचालन किया।
इस सम्मेलन में कुल 82 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें फादर यूजीन जोसेफ, 10 पादरी, और पूरे भारत से विभिन्न भाषाई व सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले आम विश्वासी (लेटी) शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान कई जाने-माने विशेषज्ञों ने ज्ञानवर्धक सत्रों का संचालन किया। फादर जोसेफ ने कलीसिया (चर्च) के भीतर आम विश्वासियों की 'राजकीय भूमिका' (kingly role) पर प्रकाश डाला।
छत्तीसगढ़ से 'कमीशन फॉर लेटी' के क्षेत्रीय सचिव फादर सलेम और नागरकोइल (कन्याकुमारी) के पुरोहित, सामाजिक कार्यकर्ता व एक्टिविस्ट फादर एडविन जॉन ने संत देवसहायम के जीवन पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि एक नए ईसाई होने के बावजूद, येसु के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और कट्टरपंथियों द्वारा दिए गए भीषण अत्याचार व शहादत को सहने का उनका साहस, आज भी एक गहरी प्रेरणा देता है।
तमिलनाडु के मारिया देवसहायम ने एक चमत्कारिक चंगाई (healing) का अपना अनुभव साझा किया। वे एक ऐसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके कारण वे बैठने या चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गए थे। वहीं, समीर लाहिड़ी ने पश्चिम बंगाल में कट्टरपंथी समूहों द्वारा ईसाइयों पर किए जा रहे अत्याचारों के बारे में बात की।
JD एकेडमी ऑफ एक्सीलेंस के निदेशक फादर एंथनी सेबेस्टियन ने कैथोलिक युवाओं की भूमिका पर चर्चा की और उन्हें सिविल सेवा परीक्षाओं के माध्यम से प्रशासनिक सेवाओं (ब्यूरोक्रेसी) में जाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके अलावा, मुंबई की वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता क्लिपसी बंजी ने भारत की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और इस पर कैथोलिक समुदाय की प्रतिक्रिया पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन में प्रतिभागियों ने CCBI 'कमीशन फॉर लेटी' के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी रिपोर्टें और अपने अनुभव भी साझा किए। तंजावुर के बिशप सगायाराज थंबुराज, जो तमिलनाडु 'कमीशन फॉर लेटी' के अध्यक्ष भी हैं, ने उपस्थित लोगों का उत्साह बढ़ाया और आम विश्वासियों (लेटी) के सशक्तिकरण के लिए कई नई पहल का प्रस्ताव रखा। रोज़ाना सुबह की प्रार्थनाओं और पवित्र यूख्रिस्ट (प्रभु-भोज) के आयोजन ने प्रतिभागियों के बीच आपसी मेल-जोल को बढ़ावा दिया और उनके आध्यात्मिक विकास में मदद की।
