अंतरधार्मिक सभा ने महाधर्माध्यक्ष अंजेलो फर्नांडिस की अमिट विरासत को याद किया
महाधर्माध्यक्ष अंजेलो इनोसेंट फर्नांडिस की जयंती के अवसर पर, नई दिल्ली के सैनिक कॉलोनी स्थित संत लूकस गिरजाघर में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए। वे मित्रता, आपसी सम्मान और बातचीत की भावना से एक साथ आए। इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष फर्नांडिस की अमिट विरासत को याद किया गया, जिनका शांति, न्याय और अलग-अलग धर्मों के बीच मेलजोल के लिए जीवनभर का समर्पण कलीसिया और समाज को प्रेरणा देता है।
फादर नॉर्बर्ट के नेतृत्व में, फादर जोस टी. जे. के समर्थन से, दिल्ली महाधर्मप्रांत के अंतरधार्मिक एकता आयोग ने कार्यक्रम का आयोजन संत लूकस चर्च में किया था, जिसे 1978 में महाधर्माध्यक्ष फर्नांडीस ने शुरू किया था। यह जगह अपने आप में उनके प्रेरितिक नजरिए और मजबूत धार्मिक समुदाय बनाने के उनके समर्पण की एक हमेशा रहनेवाली निशानी है।
इस कार्यक्रम में दिल्ली के महाधर्माध्यक्ष, माननीय अनिल जे. टी. कूटो भी शामिल हुए, जिनकी मौजूदगी ने अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच बातचीत और आपसी समझ को बढ़ावा देने की अहमियत पर जोर दिया।
कार्यक्रम में महाधर्माध्यक्ष अंजेलो फर्नांडिस के जीवन और विरासत को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। विद्याज्योति ईशशास्त्रीय कॉलेज के प्रकाशन से प्रेरणा लेते हुए, उन्होंने शिक्षा, संस्था बनाने और अलग-अलग धर्मों के बीच बातचीत में महाधर्माध्यक्ष के विशेष योगदान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि महाधर्माध्यक्ष फर्नांडिस का दृष्टिकोण अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच समझ और सहयोग को बढ़ावा देने की कलीसिया की प्रेरिताई का मर्गदर्शन करता है।
महाधर्माध्यक्ष अंजेलो इनोसेंट फर्नांडिस (1913–2000) ने 1967 से 1990 तक दिल्ली के महाधर्माध्यक्ष के तौर पर काम किया और वे भारत के सबसे सम्मानित कलीसियाई नेताओं में से एक हैं। द्वितीय वाटिकन महासभा (1962–1965) में महासभा के फादर और धर्म और शांति पर विश्व सम्मेलन (1970–1984) के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर पर शांति, न्याय और बातचीत को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कर दिया।
दिल्ली महाधर्मप्रांत के अंतरधार्मिक एकता आयोग ने पल्ली पुरोहित फादर उमेश एक्का, और सहायक पल्ली पुरोहित फादर सुरेश बाबू, को संत लूकस चर्च में इस कार्यक्रम की मेजबानी करने और अपना सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम सभी धर्मों के लोगों के बीच बातचीत, आपसी सम्मान और मिलकर काम करने के नए वादे के साथ समाप्त हुआ, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि महाधर्माध्यक्ष अंजेलो फर्नांडीस की हमेशा रहनेवाली विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे।
