पोप लियोः ख्रीस्त में ईश्वरीय ज्ञान का रहस्य

पोप लियो ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन द्वितीय महाधर्मसभा के धर्मसिद्धांत देई भेरबुम पर चिंतन करते हुए ईश्वर के संग मानवीय संबंध के सार पर विचार-मंथन किया।

पोप लियो 14वें ने अपने बुधावरीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्ठम के सभागार में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और सुस्वागतम।

हम वाटिकन द्वितीय महाधर्म सभा के धर्मसिद्धांत देई भेरबुम पर अपनी धर्मशिक्षा माला में दिव्य प्रकाशना पर अपना चिंतन जारी रखते हैं। हमने इस रहस्य पर चिंतन किया कि ईश्वर अपने विधान में वार्ता करते हुए हमें अपने को प्रकट करते हैं, जहाँ वे हमें मित्रों के रूप में संबोधित करते हैं। इस भांति यह हमारे लिए एक संबंध रूपी ज्ञान है, जो हमारे संग केवल विचारों को साझा करना नहीं बल्कि एक इतिहास और एकता में प्रवेश करने हेतु आपसी आदान-प्रदान की एक अभिव्यक्ति है। इस रहस्य की पूर्णतः हमारे लिए एक ऐतिहासिक और व्यक्तिगत रूप में होती है जहाँ ईश्वर स्वयं अपने को हमारे लिए देते हैं, वे अपने को हमारे लिए प्रस्तुत करते जिसके परिणाम स्वरुप हमें अपनी सच्चाई का ज्ञान गहरे रूप में होता है। यह हमारे लिए येसु ख्रीस्त में होता है। धर्मसिद्धांत हमें कहता है, “ईश्वर की गहरी सच्चाई और मानव मुक्ति हमारे लिए ख्रीस्त में ज्योतिर्मय होती है, जो हमारे लिए दोनों मध्यस्थ और सभी रहस्यों की पूर्णतः हैं।” (देई भेरबुम,2)

ईश्वर के संग हमारा संबंध का रहस्य
पोप ने कहा कि येसु हमें पिता को अपने संग संबंध में प्रवेश करने के द्वारा प्रकट करते हैं। पिता के द्वारा भेजे गये पुत्र में “मानव पवित्र आत्मा में पिता के पास पहुंचता और उसे अपने दिव्य प्रकृति में साझा करता है।” इस भांति, हम पुत्र के संग एक संबंध में प्रवेश करते हुए ईश्वर के पूर्ण ज्ञान को पवित्र आत्मा के गुणवत्त कार्य में प्राप्त करते हैं। सुसमाचार लेखक संत लूकस इस तथ्य पर जोर देते हुए ख्रीस्त के आनंद को व्यक्त करते और लिखते हैं,“स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तुति करता हूँ, क्योंकि तूने इन सब बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा कर निरे बच्चों पर प्रकट किया है। हाँ, पिता, यही तुझे अच्छा लगा। मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है। पिता को छोड़ कर यह कोई भी नहीं जानता कि पुत्र कौन है और पुत्र को छोड़कर यह कोई  भी नहीं जानता की पिता कौन है। केवल वही जानता है, जिस पर पुत्र उसे प्रकट करने की कृपा करता है।” (लूका. 10.21-22)

येसु में ईश्वरीय ज्ञान
पोप ने कहा कि हम येसु का धन्यवाद करते हैं क्योंकि हमें ईश्वर का ज्ञान अपने को उनके द्वारा जानने देने में प्रकट करते है।(गला.4.9,1 कुरू. 13.13) वास्तव में, येसु ख्रीस्त में ईश्वर ने हमारे लिए अपने को प्रकट किया है, वहीं उन्होंने हमारी असल पहचान को व्यक्त किया है कि हम उनकी संतान हैं, जो पुत्र के सदृश बनाये गये हैं। यह “अनंत शब्द...पूरे मानव को प्रकाशित करता है।” (देई भेरबुम 40), जो उनकी सच्चाई को पिता की निगाहों में प्रकट करता है, “तुम्हारा पिता, जो गुप्त को देखता है तुम्हें पुरस्कार प्रदान करेगा” (मत्ती.6.5,6.8) येसु इसकी घोषणा करते हुए उन बातों को हमारे लिए जोड़ते हैं, “तुम्हारा पिता यह जानता है कि तुम्हें किन चीजों की जरुरत है (मत्ती,6.32)। येसु हमारे लिए वे स्थल हैं जहाँ हम ईश्वर पिता की सच्चाई को पहचानते हैं वहीं हम अपने को पुत्रों के रुप में उनके पुत्र में प्रकट होने देते हैं, जिन्हें जीवन प्राप्त करने हेतु निमंत्रण दिया गया है। इस संबंध में संत पौलुस लिखते हैं, “समय पूरा हो जाने पर ईश्वर ने अपने पुत्र को भेजा...जिससे वह संहिता के अधीन रहने वालों को छुड़ा सकें औऱ हम ईश्वर के दत्तक पुत्र बन जायें। आप लोग ईश्वर के पुत्र ही हैं। इसका प्रमाण यह है कि ईश्वर ने हमारे हृदयों में अपने पुत्र का आत्मा भेजा है, जो यह पुकार कर कहता है, अब्बा, पिता।” (गला.4.4-6)

hindi Survey Popup Image