पोप : ख्रीस्तीय विश्वास को उदारता में जीया जाता है

पोप लियो 14वें ने इटली के करुणा के राष्ट्रीय परिसंघ के 210 सदस्यों से शनिवार को वाटिकन में मुलाकात की तथा विश्वासियों को प्रोत्साहित किया कि वे ख्रीस्तीय धर्म को हमारे समय के जरूरतमंदों के प्रति उदारता के कामों के साथ जीयें।

पोप ने कहा, “करुणा का इतिहास सदियों पुराना है, जिसकी जड़ें मध्य युग से जुड़ी हैं, और इसमें आम लोगों के जीवन के तीन आवश्यक पहलू शामिल हैं: आध्यात्मिकता, उदारता, और आज के जरूरतमंदों पर ध्यान देना।

पोप ने गौर किया कि संघ ने अपनी शुरुआत से ही, मुख्य रूप से अपने सदस्यों के विश्वास और संस्कारों से बल और प्रेरणा ली है। 13वीं सदी में इटली में नागरिक तथा कलीसियाई समुदायों के बीच आपसी झगड़ों के बीच, वेरोना के संत पीटर और कुछ लोकधर्मियों ने भक्ति और सेवा का एक अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। उनका उदाहरण, जल्दी ही कई लोगों तक फैल गया, पहले इटली में और फिर दूसरे देशों में, और अंततः पुर्तगाल और वहाँ से अमेरिका तक पहुंचा।

पोप लियो 14वें ने शनिवार को इटली के स्वयंसेवक संगठन से वाटिकन में मुलाकात की।     

अपने संदेश में, पोप ने करुणा के सदियों पुराने इतिहास को याद किया, जो आध्यात्मिकता, दान और आज की जरूरतों पर ध्यान देने से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता इस संगठन की नींव है, और बताया कि इसके सदस्यों की भक्ति और सेवा 13वीं सदी में पूरे इटली में फैल गई, फिर पुर्तगाल और फिर अमेरिका में जड़ें जमा लीं।

उन्होंने कहा, “जिस बीज से वह बड़ा पेड़ उगा है जिसके आप हिस्सा हैं, वह इसलिए संस्कार है— बपतिस्मा पर आधारित है—और इसलिए नैतिक और तपस्वी है।”

पोप ने संघ को प्रार्थना, धर्मशिक्षा और संस्कार, खासकर रविवारीय मिस्सा बलिदान तथा पापस्वीकार के प्रति वफादार रहकर अपने सदस्यों के ख्रीस्तीय होने को बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने दल में “करुणा के संरक्षकों” को लाने की सराहना की, जो लोकधर्मी हैं जो दूसरे लोकधर्मियों को उनके विश्वास की यात्रा में प्रेरित करते और आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

उन्होंने कहा, “उनकी सेवा, सह-जिम्मेदारी, स्नेह और सहभागिता के माहौल में की जाती है, जिसमें सभी ख्रीस्तीय विश्वासी धर्म में पूरी तरह से आगे बढ़ने की एक आम कोशिश में अहम भूमिका निभाते हैं।”

इसके बाद पोप लियो ने करुणा के सदस्यों को बिना किसी स्वार्थ के उदारता के काम करने के लिए आमंत्रित किया, जैसा कि वे अपने लंबे इतिहास में करते आए हैं।

उन्होंने कहा कि करुणा के सदस्य युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं के समय मौजूद रहते हैं, और वे समाज के सभी लोगों के बीच उदारता के सुसमाचार की गवाही देते हैं।

उन्होंने कहा, “आप सिर्फ ‘करने’ तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि आप ‘साथ चलने’ के लिए खुद को तैयार करते हैं, हरेक की प्रतिष्ठा और उनकी कहानी के साथ दूसरों में भाई-बहनों को पहचानते हैं।”

पोप ने समय की मांग के अनुसार संघ के ढलने और हमेशा दूसरों की भलाई के लिए मिलकर काम करने की बात कही।

युग के अनुसार लोगों की जरूरतें बदलीं, और इटली की करुणा का राष्ट्रीय संघ उन जरूरतों के साथ बदल गया।

अंत में, पोप लियो 14वें ने लोकधर्मियों को उदारता के माध्यम से अपने विश्वास को पूरी लगन से जीने के लिए प्रोत्साहित किया तथा हमेशा उम्मीद, उदारता और शांति का संदेशवाहक बने रहने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा, “आत्मा में बढ़ने का लक्ष्य रखें,” और खुशी और सादगी से सेवा करें, ताकत के हर तर्क से दूर रहें, ईश्वर की महिमा और उन लोगों की भलाई के लिए समर्पित रहें जिन्हें ईश्वर आपके रास्ते में रखते हैं।”