यौन दुराचार से बच्चों की रक्षा के लिए कलीसिया की मांग

इस्लामाबाद-रावलपिंडी धर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष जोसेफ अरशद, बच्चों को दुर्व्यवहार या शोषण से बचाने के लिए पाकिस्तान में कलीसिया की प्रतिबद्धता पर चिंतन करते हुए जोर देते हैं कि "बाल सुरक्षा सिर्फ एक पारिवारिक मामला नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय नैतिक जिम्मेदारी है।"

पाकिस्तान के इस्लामाबाद-रावलपिंडी धर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष जोसेफ अरशद ने इस बात पर जोर दिया है कि "बच्चों की सुरक्षा बहुत जरूरी है।" और पाकिस्तानी समाज में बच्चों के शोषण के बढ़ते मामलों पर "गहरी चिंता" जताई है।

महाधर्माध्क्ष ने परमधर्मपीठीय न्यूज एजेंसी फिदेस को बताया कि "पाकिस्तान में बच्चों के यौन शोषण का मुद्दा अभी भी बहुत फैला हुआ है और इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।"

अपहरण, बलत्कार और बच्चों का दैनिक शोषण
पाकिस्तानी गैर-सरकारी संगठन (NGO) साहिल की एक रिपोर्ट के आंकड़ों का जिक्र करते हुए, जो रोज देशभर में बच्चों के शोषण पर नजर रखता है, जिसका शीर्षक 'क्रूर संख्या' है, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि 2025 में, "रिपोर्ट किए गए मामलों में 8 प्रतिशत की खतरनाक बढ़ोतरी हुई है, जिसमें हिंसा के 3,630 पुष्ट मामले हैं, यानी हर दिन औसतन नौ से अधिक बच्चों का शोषण हुआ है।"

रिपोर्ट में कहा गया कि अपहरण और बलत्कार के अपराध आम हो चुके हैं, जिनमें 53 प्रतिशत पीड़ित लड़कियाँ हैं, और 11 से 15 साल की बच्चियाँ सबसे अधिक निशाने पर हैं।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि "बच्चों के खिलाफ अपराध मानव प्रतिष्ठा के सबसे शर्मनाक और बर्दाश्त न किए जा सकनेवाले अपराध हैं।"

उनकी रक्षा 'सबसे ऊंचे स्तर की नैतिक, सामाजिक, कानूनी और संस्थागत जिम्मेदारी के साथ की जानी चाहिए।'

उन्होंने जोर देकर कहा, "कोई भी समाज खुद को न्यायसंगत, शांतिप्रिय या सभ्य नहीं कह सकता, जब तक उसके बच्चे खतरे, डर और असुरक्षा में जीते हों," क्योंकि वे "ईश्वर प्रदत्त वरदान हैं और उनकी सबसे ऊंचे स्तर की नैतिक, सामाजिक, कानूनी और संस्थागत जिम्मेदारी के साथ सुरक्षा की जानी चाहिए।"

इस मामले में, महाधर्माध्यक्ष अरशद ने पाकिस्तान सरकार, कानून लागू करनेवाली एजेंसियों, बच्चों के सुरक्षा विभाग और सभी संबंधित संस्थाओं से "ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत, पक्के, पारदर्शी और अच्छे कदम उठाने" की अपील की।

उन्होंने "बच्चों के साथ गलत व्यवहार करनेवालों को बिना देर सजा दिलाने और चुप्पी, लापरवाही और कानून लागू न करनेवालों को नकारने" की अपील की।

इस मुद्दे पर ध्यान खींचने के लिए, उत्तरी पाकिस्तान में इस्लामाबाद-रावलपिंडी के काथलिक समुदाय ने "बच्चों का साल" मनाकर 2026 को बच्चों को समर्पित किया है।

कलीसिया का पक्का वादा
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल का मकसद "बच्चों की इज्जत, सुरक्षा, शिक्षा, विकास और पूरी तरह से उनकी भलाई को बढ़ावा देने के लिए कलीसिया का पक्का वादा" दिखाना है।

उन्होंने कहा कि अपने पल्ली, स्कूलों और संघ के जरिए धर्मप्रांतीय समुदाय "जागरूकता बढ़ाती रहेगी और परिवारों, स्कूलों, पल्लियों और समुदाय को हर बच्चे की सुरक्षा एवं विकास के लिए मिलकर काम करने हेतु बढ़ावा देगी।"

इसके अलावा, महाधर्माध्यक्ष अरशद ने माता-पिता, शिक्षकों, धार्मिक नेताओं, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी नागरिकों से "बच्चों की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी मानने" की अपील की।

उन्होंने माता-पिता से "सतर्क रहने, अपने बच्चों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने, ध्यान से सुनने और उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में बताने" की अपील की।

'गलत इस्तेमाल के हर शकवाले मामले की रिपोर्ट सही अधिकारियों को जरूर करें'
उन्होंने कहा कि समाज को "चुप्पी, डर, बदनामी और बेपरवाही को नकारना चाहिए" और "गलत इस्तेमाल के हर शक वाले मामले की रिपोर्ट सही अधिकारियों को करनी चाहिए।"

"बाल सुरक्षा सिर्फ एक पारिवारिक मामला नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय नैतिक जिम्मेदारी है," महाधर्माध्यक्ष अरशद ने रेखांकित करते हुए कहा, "हमारे प्यारे बच्चे एक ऐसे समाज के लायक हैं जहां वे बिना किसी डर के रह सकें, सम्मान के साथ बढ़ सकें और आशा के साथ भविष्य की ओर देख सकें।"

पाकिस्तानी महाधर्माध्यक्ष ने अंत में धर्म की परवाह किए बिना सभी से मिलकर काम करने और बच्चों की भलाई में योगदान देने की अपील की।